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मोदी-जिनपिंग ने मुलाकात के लिए क्यों चुना तमिलनाडु का महाबलीपुरम

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 अक्तूबर को दो दिवसीय दौरे पर दूसरी अनौपचारिक वार्ता के लिए भारत आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जिनपिंग की मुलाकात दिल्ली में न होकर तमिलनाडु के महाबलीपुरम में होनी प्रस्तावित है। शी जिनपिंग के भारत दौरे के पहले यह सवाल उठ रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने मुलाकात के लिए महाबलीपुरम शहर को क्यों चुना आखिर महाबलीपुरम में पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति को क्या दिखाना चाहते हैं और ये मुलाकात दोनों देशों के लिए कितनी अहम रहने वाली है तमिलनाडु में बंगाल की खाड़ी किनारे स्थित महाबलीपुरम शहर चेन्नई से करीब 60 किमी दूर है। इस नगर की स्थापना धार्मिक उद्देश्यों से सातवीं सदी में पल्लव वंश के राजा नरसिंह देव बर्मन ने करवाया था। पुरातत्व शोध के दौरान महाबलीपुरम से चीनी, फारसी और रोम के प्राचीन सिक्के बड़ी संख्या में मिले हैं। इतिहासकारों के अनुसार महाबलीपुरम और चीन का संबंध करीब 2000 साल पुराना है। महाबलीपुरम में व्यापार के लिए बड़ी संख्या में चीनी व्यापारी आया करते थे। महाबलीपुरम के पास में ही स्थित कांचीपुरम में 7वीं सदी में पल्लव शासन के दौरान चीनी यात्री ह्वेन सांग आए थे। जिन्होंने अपनी किताब में दक्षिण भारत की भव्यता और चीनी संबंधों का वर्णन किया है। चीनी राष्ट्रपति शुक्रवार दोपहर चेन्नई पहुंचेंगे। जहां उनका पारंपरिक नृत्य और संगीत के साथ एयरपोर्ट पर स्वागत किया जाएगा। इसके बाद दोनों नेता महाबलीपुरम के लिए रवाना होंगे। यहां जिनपिंग और मोदी के कई मंदिरों में दर्शन करने का कार्यक्रम है। शाम को जिनपिंग सांस्कृतिक समारोह में शामिल होंगे और पीएम मोदी उन्हें डिनर भी देंगे।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 10, 2019, 12:35 IST
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