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पांच रेलवे कर्मियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल

मुजफ्फरनगर। खतौली में करीब तीन साल पहले 19 अगस्त 2017 को हुए कलिंगा-उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में जीआरपी द्वारा जांच पूरी कर पांच रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। उक्त सभी कर्मियों के खिलाफ पहले ही विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है।जनपद के कस्बा खतौली में 19 अगस्त 2017 को शाम के समय उड़ीसा के पुरी से चलकर हरिद्वार जा रही कलिंगा-उत्कल एक्सप्रेस बेपटरी हो गई थी। भीषण हादसे में एक्सप्रेस ट्रेन की 23 में से 14 बोगियां पलट गईं थीं, जिसमें 23 मुसाफिरों की मौत हो गई थी और सौ से अधिक यात्री घायल हुए थे। तत्कालीन खतौली जीआरपी चौकी प्रभारी अजय कुमार ने हादसे की रिपोर्ट जीआरपी थाने में दर्ज कराई थी, जिसकी जांच तत्कालीन जीआरपी थानाध्यक्ष ने शुरू की। हालांकि कुछ समय बाद ही तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु के निर्देेश पर हादसे की जांच सीओ जीआरपी गाजियाबाद को सौंप दी गई थी। हादसे के करीब तीन साल बाद उक्त हादसे की जांच पूरी कर अब चार्जशीट सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट नंबर एक में दाखिल कर दी गई है। चार्जशीट में तत्कालीन जेई प्रदीप कुमार, स्टेशन मास्टर खतौली प्रकाशचंद, सेक्शन कंट्रोलर पीवी तनेजा, सीनियर सेक्शन इंजीनियर इंद्रजीत सिंह व हैमरमैन बिजेंद्र सिंह को आरोपी बनाया गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ हो चुकी है विभागीय कार्रवाईमुजफ्फरनगर। खतौली के भीषण उत्कल ट्रेन हादसे में जिन पांच रेलवे कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है, उन सभी के खिलाफ पहले ही विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है। रेलवे द्वारा जहां हादसे के आरोपी जेई प्रदीप कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था वहीं, स्टेशन मास्टर प्रकाशचंद व सेक्शन कंट्रोलर पीवी तनेजा को वीआरएस दे दिया गया था। इनके अलावा, सीनियर सेक्शन इंजीनियर इंद्रजीत सिंह व हैमरमैन बिजेंद्र सिंह को चेतावनी दी गई थी। एक साल अफसरों की टेबल पर रखी रही चार्जशीटमुजफ्फरनगर। तीन साल पहले 19 अगस्त 2017 में हुए भीषण उत्कल ट्रेन हादसे की कार्रवाई को भी रेलवे में एक साल तक अफसरों की टेबल पर लटकाए रखा गया।हादसे की जांच करने वाले सीओ जीआरपी रमेशचंद त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने एक साल पूर्व ही जांच पूरी कर चार्जशीट तैयार कर डीआरएम दिल्ली के यहां भेज दी थी। वहां से चार्जशीट को कोर्ट में दाखिल करने की अनुमति नहीं दी गई। चार्जशीट को अनुमति न देने के लिए आला अफसरों द्वारा कहा गया कि सभी पांचों दोषी रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ पहले ही विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में चार्जशीट का औचित्य नहीं बनता। इस पर जीआरपी मुजफ्फरनगर में मुकदमा दर्ज होने का हवाला देते हुए चार्जशीट दाखिल करने की बात कही गई। इसके बावजूद एक साल तक यह चार्जशीट अफसरों की मेज पर बंधक बनी रही। आखिरकार अब आकर यह चार्जशीट सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट नंबर-एक में दाखिल की गई। कर्मचारियों की लापरवाही से हुआ था हादसामुजफ्फरनगर। 19 अगस्त 2017 को खतौली में हुए भीषण ट्रेन हादसे की वजह मानवीय लापरवाही रही थी। दरअसल, उस दिन शाम करीब चार बजे खतौली स्टशेन से करीब पांच सौ मीटर आगे तिलकराम इंटर कॉलेज के पास जेई प्रदीप कुमार के निर्देशन में ट्रेन की पटरी बदलने का काम किया जा रहा था। पटरी बदलने के लिए न तो कर्मचारियों ने किसी तरह का ब्लॉक लिया और न ही इसकी जानकारी कंट्रोल रूम को दी गई। पटरी बदलते हुए ही शाम 5.20 बजे कलिंगा-उत्कल एक्सप्रेस वहां आ पहुंची, जिसे देख पटरी बदल रहे कर्मचारी बिना ट्रेन रुकवाने का कोई प्रयास किए काम अधूरा छोड़ वहां से रफूचक्कर हो गए थे। नतीजतन, एक्सप्रेस ट्रेन के 14 डिब्बे बेपटरी होकर पलट गए, जिसके चलते 23 लोग अपनी जान गंवा बैठे। हादसे में एक सौ से अधिक यात्री घायल हुए थे। यह इस क्षेत्र का सबसे बड़ा रेल हादसा था।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 12, 2020, 23:54 IST
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