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यूपी के इस जिले में अब तक 38 कत्ल, पुलिस हर बार रही नाकाम, सबूत हैं ये पांच केस

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में कानून व्यवस्था खराब है। लगातार हत्याओं से दहशत बन गई है। लखनऊ और दिल्ली तक होने वाली वारदातों में बागपत का लिंक मिलता है। जेल में बैठे अपराधी मोबाइल पर हथियारों का सौदा कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन रहा। लोग अपने घरों में रहे। इसके बावजूद जिले में हत्याओं का सिलसिला चलता रहा। साल 2020 में अब तक 38 हत्याएं हो चुकी हैं। यानी हर महीने पांच हत्या और पुलिस कुछ कर नहीं पा रही है। केस - एक बासौली गांव में एक जून को युवकों के दो गुटों के बीच झगड़ा हो गया, जो पुलिस की लापरवाही से खून-खराबे में बदल गया। गांव में तीन युवकों की हत्या कर दी गई। पुलिस सिर्फ जांच में उलझी है, अभी तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। केस - दो कूड़ी गांव में 22 जून को कुख्यात परमवीर तुगाना और उसके साथियों पर फायरिंग की गई। अस्पताल में उपचार के दौरान परमवीर की मौत हो गई। पुलिस ने खुलासा किया कि जिला पंचायत चुनाव की रंजिश में सुनील राठी ने हत्या की वारदात कराई है। केस - तीन बदरखा गांव में रालोद नेता देशपाल बदरखा की सात जुलाई को हत्या कर दी गई। सरेआम हुई हत्या में भी पुलिस की लापरवाही रही। बदरखा में पिछले दो साल से बन रहे तनाव के माहौल को पुलिस-प्रशासन के लोग आखिर क्यों नहीं भांप सके। यह भी पढ़ें:भाजपा नेता की हत्या मामले में दो आरोपी गिरफ्तार, बदमाशों ने ऐसे दिया था वारदात को अंजाम

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 12, 2020, 13:06 IST
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