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अमेरिकी-यूरोपीय लोगों को खूब लुभाएंगी आम की दीपशिखा और मनोहारी वैरायटी

फलों का राजा आम अपनी मिठास के कारण पूरी दुनिया में भारत के नाम का डंका बजा रहा है। इसका सीधा लाभ हमारे देश के आम उत्पादक किसानों और व्यापारियों को हुआ है। यूरोपीय और अमेरिकी समाज के लोग अपेक्षाकृत कम मिठास के फल खाना ज्यादा पसंद करते हैं। यही कारण है कि उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए पूसा के वैज्ञानिकों ने दो ऐसे विशेष आम विकसित किए हैं जो अन्य आम फलों की तुलना में कम मीठे हैं, लेकिन अपने स्वाद और स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण इनकी खूब मांग रह सकती है। कम मीठा होने के कारण शुगर पीड़ित लोग भी इसे खा सकते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा), नई दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर संजय सिंह ने अमर उजाला को बताया कि पूसा दीपशिखा (हाईब्रिड 11-2) आम्रपाली और सेंसशन के संकरण से प्राप्त संकर किस्म है। इसके पेड़ नियमित फल देने वाले और अर्ध-बौने आकार के होते हैं। इस प्रजाति के पेड़ों से प्राप्त फल अधिकांशतया सामान आकार के, लंबे आकार के, आकर्षक, चमकदार, लाल छिलके और नारंगी-पीले गूदे वाले होते हैं, जो अमेरिकी-यूरोपीय समुदाय में बहुत पसंद किए जाते हैं। इनके पेड़ों को मध्यम सघन बागवानी 6X6 मीटर पर लगाना ज्यादा लाभदायक है। प्रति हेक्टेयर के आधार पर लगभग दस साल पुराना पेड़ 50.33 किलोग्राम फल देता है। इस किस्म की प्रति हेक्टयर अनुमानित उपज 14.3 टन है। पूसा दीपशिखा (हाइब्रिड 11-2) के फल मध्यम मिठास (18.67 डिग्री ब्रिक्स) वाले, 70 फीसदी गूदे वाले, एस्कोर्बिक एसिड (35.34 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम गूदा) और बीटा कैरोटीन (9.48 मिलीग्राम) पाया गया है। इन फलों की भंडारण आयु कमरे के सामान्य तापमान पर भी 7-8 दिनों की होती है। इससे व्यापारियों को बिना फल खराब हुए इसे बेचने के लिए लंबा समय मिलता है, जो व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 01, 2020, 20:55 IST
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