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गन्ने में लगा पोक्का बोईंग रोग

शामली। गन्ने में लगने वाला पोक्का बोईंग रोग का असर शुरू हो गया है। इसका असर शामली के आसपास के कुछ गांवों जैसे बनत, समसपुर, जलालपुर एवं समेत कई गांवों की गन्ने की फसल में देखने को मिला है। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक शीशपाल सिंह के मुताबिक गन्ने में लगने वाला पोक्का बोईंग एक फफूंदी जनित रोग है। जून माह से सक्रिय होकर सितंबर माह के बीच गन्ने की फसल में रहता है। पोक्का बोईंग रोग का असर शामली के आसपास के समसपुर, जलालपुर बनत एवं गांवड़ी के खेतों में दिखना शुरू हो गया है। इसका असर फिलहाल गन्ने की फसल में आंशिक लक्षण दिखाई देने लगे हैं। यह रोग बरसात के दिनों में तेजी से फैलता है। खेत में पानी भरने और हवाओं में तेजी से फैलता है। गन्ने की सीओ 0238 गन्ने की प्रजाति में यह रोग ज्यादातर असर करता है। गन्ने की बढ़वार को रोकता है। प्रारंभिक अवस्था में अगोले की पत्तियों पर सफेद धब्बे पड़ते हैं, इसके बाद पत्तियां पीली पड़कर सिकुड़ना शुरू हो जाती हैं और पत्तियों बीच से कट जाती हैं, जैसे किसी ने चाकू से काट दिया हो। संक्रमण की तीव्रता अधिक होने पर अगोले की सारी पत्तियां मुड़कर, सुखकर गिर जाती हैं। उन्होंने बताया कि गन्ने का ऊपरी भाग ठूंठ की भांति दिखाई देता है। पत्तियों के सड़कर नीचे गिर जाने से पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है। उत्पादन में भारी कमी आ जाती है। कई बार किसान भाई इस रोग को टॉप बोरर कीट का प्रकोप समझकर कीटनाशक दवा का छिड़काव कर देते हैं जिससे कोई फायदा नहीं होता है। पोक्का बोईंग रोग से बचाव के लिए किसानों को गन्ने की रोगरोधी प्रजाति का चुनाव करना चाहिए। बुवाई से पूर्व बीजोपचार अवश्य करें, खेत में उचित जल निकास का प्रबंध करें। रोग ग्रस्त पौधे को उखाड़ कर मिट्टी में दबा दें। इसकी रोकथाम हेतु कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का 3.0 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर 10-15 दिन के अंतराल पर दो छिड़काव करने चाहिए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 12, 2020, 23:54 IST
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