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गौरीकुंड हाईवे पर दो वर्ष में बने दस नए भूस्खलन जोन

अगस्त्यमुनि। मूसलाधार बारिश के कारण रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे सौंडी व गिंवाला में भूस्खलन के कारण दस घंटे से अधिक समय तक बंद रहा।शुक्रवार देर रात्रि को हुई बारिश के कारण हाईवे पर सौंडी, गिंवाला, बांसवाड़ा समेत अन्य संवेदनशील स्थानों पर पहाड़ी से हुए भूस्खलन के कारण भारी मलबा जमा हो गया था। एनएच व कार्यदायी संस्था द्वारा मशीनों से मलबा सफाई का कार्य शुरू किया गया। अन्य प्रभावित स्थानों पर सुबह 8 बजे तक मलबा साफ कर दिया गया था, लेकिन सौड़ी व गिंवाला में पहाड़ी से भूस्खलन रुक-रुककर होता रहा। एनएच के ईई जितेेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि हाईवे निर्माणाधीन है, जिससे जगह-जगह मलबा गिर रहा है। कार्यदायी संस्था समेत मशीन ऑपरेटर को भी जरूरी निर्देश दिए गए हैं।गौरीकुंड हाईवे पर सक्रिय हुए कई भूस्खलन जोनरुद्र्रप्रयाग। ऑल वेदर रोड परियोजना में निर्माणाधीन रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर दो वर्ष में कई नए डेंजर बन चुके हैं। एनएच द्वारा वैज्ञानिक तकनीक से संवेदनशील स्थानों का ट्रीटमेंट करने की बात कही जा रही है, लेकिन इस पर अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। डोलिया मंदिर के समीप बीते तीन साल में भूधंसाव से एनएच द्वारा ऊपरी तरफ 45 मीटर अतिरिक्त कटान किया जा चुका है, जिससे खाट गांव की कई गोशाला व खेत भी ध्वस्त हो चुके हैं। वहीं बांसवाड़ा में दो सौ मीटर हिस्सा भूस्खलन की दृष्टि से सबसे खतरनाक बना हुआ है। वहीं, सेमी में हाईवे भूधंसाव की चपेट में है। बदरीनाथ हाईवे भी सिरोहबगड़ से नगरासू के बीच तीन-चार स्थानों पर खतरनाक बना है। ईई जितेंद्र कुमार त्रिपाठी का कहना है कि गौरीकुंड हाईवे का चौड़ीकरण व पुश्ता निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भूस्खलन व भूधंसाव जोन की वैज्ञानिक विधि से मरम्मत की जानी है। इसके लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 01, 2020, 20:51 IST
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