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स्टेशनों पर पसरा सन्नाट: ट्रेन के पहिए नहीं थमे, यात्रियों के पदचाप थम से गए

कोरोना संक्रमण के दौर में मानों देश और दुनिया ठहर गई है। नई दिल्ली स्टेशन पर जहां रोजाना पांच लाख से अधिक लोगों की प्रतिदिन चहल-पहल रहती थी वहीं इनदिनों बमुश्किल यात्री दिखाई पड़ रहे है। लंबी दूरी की ट्रेनें तो चल रही हैं, बावजूद स्टेशन पर सन्नाटा पसरा रह रहा है। मानों देश की राजधानी का नहीं किसी कस्बे का स्टेशन हो। यात्रियों की कमी को देखते हुए रेलवे भी लगातार ट्रेनों को निरस्त करने को मजबूर है। पिछले साल के देश व्यापी लॉकडाउन में जहां ट्रेन के पहिए थम गए थे तो इस साल ट्रेन के पहिए पटरी पर तो दौड़ रहे हैं, लेकिन यात्री महामारी के दौर में गायब हैं। देश की राजधानी दिल्ली के स्टेशनों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। आने व जाने वाली ट्रेनें 40 प्रतिशत भी नहीं भरी रह रही है। कुछ यात्री स्टेशन पर पहुंच भी रहे हैं तो वह प्लेटफार्म पर चहलकदमी करने की बजाए कोविड प्रोटोकॉल या संक्रमण के खतरे को भांपते हुए सीधा शांतिपूर्वक ट्रेन में अपनी सीट पर बैठ जा रहे हैं। यहां तक कि खाने-पीने के स्टॉल पर भी नहीं पहुंच रहे हैं। इस वजह से प्लेटफार्म पर खाद्य पदार्थ बेचने वालों के भी रोजगार का साधन इनदिनों खत्म हो रहा है। ऑटो-टैक्सी वालों की भीड़ तो है, लेकिन यात्रियों का टोटा हो गया है। ट्रेनों की संख्या घटी: सुनित शर्मा इस स्थिति को देखते हुए रेलवे भी ट्रेनों की संख्या में लगातार कटौती कर रहा है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष सुनित शर्मा ने बताया कि कोरोना के पहले देशभर में कुल मेल व एक्सप्रेस ट्रेन 1768 चल रही थीं तो इस दौरान महज 1005 ट्रेनें ही लंबी दूरी की चल रही हैं। इसी तरह देशभर में महज 517 पैसेंजर ट्रेन तो सबअर्बन रेलवे में 3893 लोकल चल रही हैं। ट्रेनों में यात्रियों की संख्या की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। खाद्य पदार्थ बिक्री करने वालों के सामने रोजगार का टोटा: रविंद्र गुप्ता स्टेशन पर यात्रियों की कमी की वजह से खाद्य पदार्थ की बिक्री करने वालों के के सामने भी खाने की समस्या उत्पन्न हो रही है। कई छोटे-छोटे वेंडर हैं जो रोज कमाते हैं व रोज खाते हैं। कोविड की वजह से उनका भी रोजगार खत्म हो रहा है। रेलवे खानपान लाइसेंसी वेंडर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता ने बताया कि स्टेशन पर लाखों छोटे वेंडर खाने-पीने का सामान बिक्री कर अपना जीवन यापन करते हैं। कोविड के दौरान उनका रोजगार संकट में आ गया है। स्टेशन पर यात्री नहीं होने की वजह से खरीदार भी नहीं है। भूखमरी का शिकार हो रहे लाइसेंसी वेंडरों के परिजनों के कानूनी उत्तराधिकार के लिए भी कई बार रेलवे अधिकारियों से अपील की गई, लेकिन सुनवाई तक नहीं है। नई दिल्ली: शाम साढ़े पांच बजे का नजारा नई दिल्ली से हावड़ा जाने वाली पूर्वा एक्सप्रेस सोमवार शाम पांच बजे प्लेटफार्म नंबर 15 पर लग गई। यह ट्रेन तय समय के अनुसार शाम 5:40 बजे रवाना होनी थी। इस दौरान पूरे 40 मिनट तक प्लेटफार्म पर सन्नाटा पसरा रहा। चंद यात्री ही इस ट्रेन से रवाना होने के लिए नई दिल्ली स्टेशन पहुंचे हुए थे। जबकि आम दिनों में इस ट्रेन पर चढ़ने की आपाधापी मची रहती है। इसी तरह सुबह करीब आठ बजे पटना राजधानी जब नई दिल्ली पहुंची तो इस ट्रेन से पहुंचने वालों की संख्या भी गिनती की ही थी। इस ट्रेन से दिल्ली पहुंचे राकेश व अनामिका ने बताया कि ट्रेन में भीड़ बिलकुल ही नहीं थी। इस वजह से सफाई व्यवस्था भी बेहतर थी। यह भी कहा कि ट्रेन की लेटलतीफी इस दौरान भी कम नहीं हो रही है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 18, 2021, 02:10 IST
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कोरोना संक्रमण के दौर में मानों देश और दुनिया ठहर गई है। नई दिल्ली स्टेशन पर जहां रोजाना पांच लाख से अधिक लोगों की प्रतिदिन चहल-पहल रहती थी वहीं इनदिनों बमुश्किल यात्री दिखाई पड़ रहे है।