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अलीगढ़ः मंडल में रिकॉर्ड एक करोड़ कोविड रोधी टीकाकरण

कौशल कुमार ओझा गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले उत्तर प्रदेश ने 25 करोड़ कोविड रोधी टीकाकरण का लक्ष्य हासिल किया है, जो देश में सर्वाधिक है। इसमें एक करोड़ टीकाकरण का योगदान अलीगढ़ मंडल के चार जनपदों का है। मंडल ने मंगलवार को एक करोड़ टीकाकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया है।कोरोना की भयावह स्थिति के बीच 16 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया था। उसी समय स्पष्ट हो गया था कि इस महामारी से टीका ही बचाएगा। एक साल नौ दिन बाद मंडल के अलीगढ़, हाथरस, एटा एवं कासगंज जनपद के स्वास्थ्य कर्मियों ने दिन-रात मेहनत कर एक करोड़ टीका लगाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। महामारी के दौर में टीकाकरण अभियान को प्राथमिकता की सूची में शीर्ष पर रखा गया।अधिकारी बोले -खुशी की बात है कि आज ही के दिन प्रदेश ने 25 करोड़ एवं अलीगढ़ मंडल ने एक करोड़ टीका लगाने का लक्ष्य हासिल किया है। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इसमें चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मीं, प्रशासन, जन प्रतिनिधि, गैर सरकारी संस्थाओं के साथ ही नागरिकों की बड़ी भूमिका है।- डॉ. एसके उपाध्याय, एडी हेल्थ, अलीगढ़ मंडलमंडल द्वारा आज एक करोड़ टीकाकरण का लक्ष्य हासिल किया गया है। प्रदेश के 25 करोड़ के टीकाकरण में अलीगढ़ मंडल का योगदान एक करोड़ है। सबसे अधिक योगदान उन स्वास्थ्यकर्मियों की है, जिन्होंने पर्व-त्योहार एवं अवकाश के दिन काम कर अभियान को यहां तक पहुंचाया है।- डॉ. देवेंद्र वार्ष्णेय, मंडलीय सर्विलांस अधिकारीकिस जिले में कितना टीकाजिला कुल डोज प्रथम डोज दूसरी डोजअलीगढ़ 4348646 96.4 प्रतिशत 58.2 प्रतिशतहाथरस 1943858 95.4 प्रतिशत 68.9 प्रतिशतएटा 2092306 94.9 प्रतिशत 65.6 प्रतिशतकासगंज 1651262 97.1 प्रतिशत 60.7 प्रतिशतप्रधानमंत्री ने कहा था इस बीमारी ने तो बीमार को ही अकेला कर दिया16 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया था। उस समय फ्रंटलाइन वर्कर को टीका लगाया गया था। इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय एवं मोहनलाल गौतम महिला चिकित्सालय में भी दिखाया गया था। संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंखों से आंसू छलक पड़े थे। उन्होंने कहा था, इस बीमारी ने तो बीमार को ही अकेला कर दिया। मां रोती थी, लेकिन चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती थी। बुजुर्ग पिता अस्पताल में अकेले हो गए। मृत्यु होने पर परंपरा के अनुसार अंतिम विदाई भी नहीं मिल सकी, जिसके वह हकदार थे। सोचकर मन सिहर जाता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 25, 2022, 23:45 IST
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