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ये जो ज़िन्दगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है - राजेश रेड्डी

ये जो ज़िन्दगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है कहीं इक हसीन सा ख़्वाब है कहीं जान-लेवा अज़ाब है कहीं छांव है कहीं धूप है कहीं और ही कोई रूप है, कई चेहरे इस में छुपे हुए इक अजीब सी ये नक़ाब है कहीं खो दिया कहीं पा लिया कहीं रो लिया कहीं गा लिया, कहीं छीन लेती है हर ख़ुशी कहीं मेहरबान बेहिसाब है कहीं आंसुओं की है दास्तांकहीं मुस्कुराहटों का बयां, कहीं बर्क़तों की है बारिशें कहीं तिश्नगी बेहिसाब है

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 04, 2021, 15:43 IST
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rajesh reddy ghazal ye jo zindagi ki kitaab hai ये जो ज़िन्दगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है - राजेश रेड्डी