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Assembly By-Election: राजेंद्र नगर विधानसभा उपचुनाव, पंजाबियों और पूर्वांचलियों के हाथ में जीत की कुंजी

राजेंद्र नगर विधानसभा के उपचुनाव का बिगुल बज गया है। तीनों प्रमुख दल फिलहाल अपने-अपने सियासी योद्धाओं को तैयार कर रहे हैं। उपचुनाव जीतकर आम आदमी पार्टी (आप), भाजपा व कांग्रेस की कोशिश दूसरों पर बढ़त हासिल करने की है। इसके लिए तीनों की निगाहें विधानसभा के सामाजिक व जातीय समीकरणों पर भी हैं। बेशक, खुले तौर पर पार्टियां मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ने की बात कर रही हैं, लेकिन उम्मीदवार तय करते वक्त यह बेहद मजबूत पक्ष होगा। दिलचस्प यह कि विधानसभा क्षेत्र में दो तबका ही 65 फीसदी से ऊपर बैठता है। पंजाबी व सिख और पूर्वांचली को एक साथ मिला देने पर इनका आंकड़ा 66.5 फीसदी होता है। नतीजतन, उपचुनाव फतह कर लेने की कुंजी इन्हीं दो सामाजिक समूहों के हाथ में होगी। दिल्ली विधानसभा के बीते चार चुनावी नतीजों पर गौर करें तो 2015 व 2020 के चुनाव में राजेंद्र नगर सीट आप के खाते में गई थी। आप के दोनों विधायकों राघव चड्ढा पंजाबी व विजेंद्र गर्ग हरियाणवीं हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से विधायक बने आरपी सिंह सिख समुदाय से आते हैं। 2008 के चुनाव में कांग्रेस के रमाकांत गोस्वामी और 1993, 1998 व 2003 में भाजपा के पूरण चंद्र योगी इस सीट से विधायक बने थे। ब्राह्मण समुदाय के रमाकांत गोस्वामी दिल्ली से हैं, जबकि योगी की पृष्ठभूमि पंजाबी रही है। जानकार बताते हैं कि 2008 तक इस सीट पर पंजाबियों का बोलबाला रहा था। यही वजह रही कि योगी लगातार जीतते रहे। 2008 में परिसीमन के बाद विधानसभा के आकार में फेरबदल हुआ। इसमें पूर्वांचली भी एक ताकत के तौर पर उभरे। इससे रमाकांत गोस्वामी की राह आसान हुई। वहीं, विजेंद्र गर्ग व राघव चड्ढा की जीत का राज भी पंजाबी व पूर्वांचली समुदाय के आप के पक्ष में जाने को बताया जा रहा है। यही वजह है कि इस बार भी तीनों दल सामाजिक व जातीय समीकरण साधने की कोशिश में हैं। उम्मीदवारों का नाम तय करने में इस समीकरण को साध ले जाने की काबिलियत भी आंकी जा रही है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 27, 2022, 04:54 IST
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राजेंद्र नगर विधानसभा के उपचुनाव का बिगुल बज गया है। तीनों प्रमुख दल फिलहाल अपने-अपने सियासी योद्धाओं को तैयार कर रहे हैं।