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पांच साल में नैक के 50 फीसदी मानक ही पूरी कर पाई पंजाब यूनिवर्सिटी, लग सकता है झटका

पंजाब विश्वविद्यालय ने पांच साल में नेशनल असिस्मेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) के महज 50 फीसदी ही मानकों को पूरा किया है। अब पीयू के पास मानकों की पूर्ति के लिए लगभग दो साल बचे हैं। इस समय में विभागों के मर्ज से लेकर एक दर्जन मानकों की पूर्ति करनी है। इतने कम समय में मानकों की पूर्ति करना असंभव दिख रहा है। इसी को लेकर शिक्षकों ने सवाल उठा दिए कि कहीं पीयू बी ग्रेड में न चला जाए। इससे पीयू को बड़ा झटका लगेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक संस्थानों की ग्रेडिंग ही तय करती है कि उन्हें कितना और कहां से फंड मिलेगा। ये हैं महत्वपूर्ण काम, जिन पर नहीं लगी अंतिम मुहर नैक की टीम ने पीयू का दौरा वर्ष 2015 में किया था। उस दौरान टीम को कमियां ही कमियां मिली थीं। छोटे-छोटे विभाग देखकर नैक की टीम ने नाराजगी जताई थी। कहा था कि एक मुख्य विभाग बनाकर अन्य छोटे विभागों को उसमें मर्ज कर दिया जाए। इससे कर्मचारियों की आवश्यकता भी कम होगी और काम भी बेहतर हो पाएगा। पीयू ने इस सुझाव पर अब तक कमेटी ही बनाई है। एक खाका खींचा भी गया, लेकिन उसका विरोध हो गया। विभागों के मर्ज करने का सबसे बड़ा काम है, लेकिन इसके लिए पीयू आगे नहीं आ रही है। जिम्मेदार भी कमेटियां बनाने तक ही सीमित हैं। नैक की टीम ने कहा था कि शिक्षकों व छात्रों के अनुपात में बड़ा अंतर है। इसे पूरा किया जाना चाहिए, क्योंकि शिक्षक कम होने के कारण शिक्षण कार्य प्रभावी नहीं हो पाता। पीयू ने इसको लेकर रिक्तियां जरूर निकालीं, लेकिन उन पर सिंडिकेट ने अड़ंगा लगा दिया। उसके बाद यह प्रकरण भी ठंडे बस्ते में चला गया। नैक की टीम ने यह भी कहा था कि च्वास्ड बेस क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू किया जाए ताकि विद्यार्थी मनपसंद विषय पढ़ सकें। पीयू ने विज्ञान संकाय में तो इसे लागू कर दिया, लेकिन कला वर्ग के विद्यार्थियों को यह लाभ अब तक नहीं मिल पाया।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 17, 2020, 09:59 IST
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