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बहुतकनीकी कॉलेज मामला: अतिरिक्त प्रधान सचिव तकनीकी शिक्षा ने बैठाई जांच

राजकीय बहुतकनीकी महाविद्यालय हमीरपुर में विद्यार्थियों को फेल करने और कक्षाओं के दौरान प्रताड़ित करने के मामले की जांच शुरू हो गई है। तकनीकी शिक्षा विभाग की अतिरिक्त प्रधान सचिव निशा सिंह ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रदेश तकनीकी शिक्षा, वोकेशनल एंड औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के निदेशक शुभकरण सिंह को इस मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त प्रधान सचिव ने स्पष्ट किया है कि अगर मामले की जांच में कोई गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित विभाग के अधिकारियों, कॉलेज प्रधानाचार्य और टीचिंग स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अमर उजाला ने 29 और 30 जनवरी के अंक में राजकीय बहुतकनीकी कॉलेज हमीरपुर के विद्यार्थियों के मामले को प्रमुखता से उठाया है। खबर छपने के बाद सचिवालय ने इस मामले में संज्ञान लेने के बाद जांच के निर्देश दिए हैं। कॉलेज में इलेक्ट्रिकल छठे सेमेस्टर के विद्यार्थियों पंकज और सुभाष चंद समेत अन्य विद्यार्थियों ने कॉलेज में प्रैक्टीकल कक्षाएं न लेने, टीचिंग स्टाफ के दुर्व्यवहार, फाइनल परीक्षा में फेल करने, पुनर्मूल्यांकन परीक्षा में दोगुना अंक मिलने, देरी से पुनर्मूल्यांकन परीक्षा परिणाम घोषित करने, कॉलेज में टीचिंग स्टाफ की हाजिरी के लिए बॉयोमीट्रिक मशीन 2016 में खरीदने व स्थापित करने और आरटीआई में इस मशीन को वर्ष 2019 में स्थापित करना बताना, कॉलेज में 32 सीसीटीवी स्थापित करने और कैमरों की कंडीशन की जानकारी न होने आदि को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विभाग और संस्थान को शिकायत पत्र सौंपने के बाद कोई संतोषजनक कार्रवाई अमल में नहीं लाए जाने पर इन विद्यार्थियों ने अब प्रधानमंत्री को लिखित शिकायत भेज कर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। जांच के बाद होगी आगामी कार्रवाई राजकीय बहुतकनीकी महाविद्यालय हमीरपुर के विद्यार्थियों का मामला ध्यान में आया है। इस मामले की जांच के लिए शुभकरण सिंह निदेशक तकनीकी शिक्षा, वोकेशनल एंड औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग मंडी को जांच के निर्देश दिए हैं। जांच के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -निशा सिंह, अतिरिक्त प्रधान सचिव, हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग। कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई : सुनील हमीरपुर कॉलेज के विद्यार्थी ने फेल होने पर पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। नियमों के तहत अगर किसी विद्यार्थी के पुनर्मूल्यांकन में 10 फीसदी से अधिक अंक बढ़ते हैं तो उत्तर पुस्तिकाएं थर्ड इवेल्यूटर को भेजनी पड़ती हैं। जिसके चलते परीक्षा परिणाम में देरी होती है। विद्यार्थियों की पुस्तिकाओं पर रोलनंबर नहीं होता है, केवल क्यूआर कोडिंग होती है। लेकिन, पंकज ने आरटीआई के जरिये उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां मांगी थीं। जिसके चलते बोर्ड ने केवल उसकी पुस्तिकाओं की प्रतियों पर रोलनंबर लिखा। प्रदेश के 60 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें से 4000 विद्यार्थियों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया। पुनर्मूल्यांकन के बाद 400 विद्यार्थियों का परिणाम में बदलाव हुआ। इस मामले में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई। -सुनील वर्मा, सचिव, हिप्र तकनीकी शिक्षा बोर्ड धर्मशाला।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 30, 2020, 17:09 IST
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