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पंचायत चुनाव : बसपा-सपा बराबरी पर, भाजपा ने भी दी कड़ी टक्कर 

आजमगढ़ मंडल के तीनों जनपदों में पंचायत चुनाव की स्थिति देखें तो सपा और बसपा जहां बराबरी पर हैं वहीं भाजपा इनसे ज्यादा पीछे नहीं है। कांग्रेस की हालत तो सुभासपा से भी खराब दिख रही है। बलिया , मऊ और आजमगढ़ तीनों जिलों में कांग्रेस ने सिर्फ चार सीटें जीती हैं वहीं सुभासपा को अकेले बलिया में सात सीटों पर मिली जीत सभी राजनीतिक दलों के लिए खतरे की घंटी है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि आगामी विधानसभा चुनावों में आजमगढ़ मंडल में त्रिकोणीय संघर्ष हो सकता है। पिछले विस चुनावों में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर सपा और बसपा का ही कब्जा रहा है। भाजपा हर बार सपा-बसपा के तिलिस्म को तोड़ने का प्रयास करती है लेकिन इसमें सफल नहीं हो पाती। पंचायत चुनावों की स्थिति पर गौर करें तो मंडल की 176 सीटों में सपा और बसपा को 26-26 सीटें, भाजपा को 22 सीटें, कांग्रेस को चार और सुभासपा को सात सीटें मिली हैं। इसके अलावा एआईएमआईएम, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल, अपना दल को एक-एक सीटें मिली हैं। वहीं आजाद समाज पार्टी के हिस्से दो सीटें आई हैं। इन आंकड़ों पर गौर तो आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा सपा और बसपा को कड़ी टक्कर देने की ओर बढ़ती नजर आ रही है। आजमगढ़ जनपद की 84 सीटों में बसपा को 10, सपा को 12 और भाजपा को 11 सीटों पर जीत मिली। जबकि कांग्रेस, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल व एआईएमआईएम को एक-एक सीटें मिली। वहीं आजाद समाज पार्टी ने दो सीटों पर कब्जा जमाया। निर्दलियों ने 45 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं मऊ में बसपा सभी राजनीतिक दलों पर भारी है लेकिन निर्दलीय यहां भी सभी राजनीतिक दलों पर भारी हैं। मऊ में बसपा को सात, सपा को दो और भाजपा को दो सीटें मिली हैं। शेष 23 सीटें निर्दलियों के हाथ लगी। वहीं बलिया जनपद की 58 सीटों में सपा का पलड़ा भारी रहा। सपा ने यहां पर 12 सीटों पर कब्जा जमाया जबकि बसपा और भाजपा को नौ-नौ सीटों से संतोष करना पड़ा। यहां पर तीन सीटें कांग्रेेस को मिली और सात सीटों पर सुभासपा के प्रत्याशियों ने बाजी मारी। 28 सीटें निर्दलियों के खाते में आई। अगर पंचायत चुनाव जैसा प्रदर्शन भाजपा विधानसभा चुनाव में भी दोहराती है तो सपा और बसपा के लिए आगे की राह बहुत कठिन होगी। सबसे खराब हालत कांग्रेस की हैं। सत्ता गवांने के बाद उत्तर प्रदेश में फिर अपना परचम फहराने की पार्टी द्वारा हर संभव कोशिश की जा रही है लेकिन विगत चार सालों में पार्टी द्वारा की गई मेहनत का फल मिलता नहीं दिख रहा है। तीन जनपदों की 176 सीटों में से पार्टी के हिस्से में मात्र चार सीटें आई। इसमें आजमगढ़ में एक और बलिया में तीन सीटें मिली। जबकि मऊ में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 06, 2021, 20:51 IST
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आजमगढ़ मंडल के तीनों जनपदों में पंचायत चुनाव की स्थिति देखें तो सपा और बसपा जहां बराबरी पर हैं वहीं भाजपा इनसे ज्यादा पीछे नहीं है।