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कानून मंत्री से अधिवक्ताओं की मांग, मुश्किल घड़ी में आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा दे सरकार

लखनऊ। प्रदेश के विधायी, न्याय व ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री ब्रजेश पाठक के साथ गुरुवार को अमर उजाला की ओर से आयोजित वर्चुअल संवाद में अधिवक्ताओं का दर्द छलक पड़ा। अधिवक्ताओं ने कहा कि कानून से हमारे हाथ बंधे हैं। हमें दूसरा काम करने की इजाजत नहीं है। बीते दो सालों से कोरोना ने ऐसी विकट चुनौतियां पैदा की हैं कि परिवार चला पाना मुश्किल हो गया है। समस्याओं से जूझ रहे अधिवक्ताओं ने राज्य सरकार से आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा की गारंटी की मांग की। वेबिनार में लखनऊ के बार एसोसिएशन, बार काउंसिल के अलावा वाराणसी, प्रयागराज, बरेली, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर व अन्य जिलों से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपनी बात रखी। कोरोना पीड़ित अधिवक्ताओं को मिले निशुल्क इलाजप्रदेश से 1800 के करीब वकीलों की कोरोना से मौत हुई है। उम्मीद थी कि सरकार हमारे लिए कुछ करेगी, लेकिन अधिवक्ताओं को बहुत निराशा हाथ लगी है। कम से कम निशुल्क इलाज का दिया आश्वासन ही पूरा कर दिया जाता।- प्रदीप कुमार सिंह, सदस्य बार काउंसिल उप्रसामाजिक सुरक्षा सरकार का दायित्वअधिवक्ताओं की सामाजिक सुरक्षा सरकार का दायित्व है। अन्य वर्गों को सरकार सामूहिक बीमा का लाभ देती है। कम से कम इस कोरोना काल में ही वकीलों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस जैसी कोई व्यवस्था तो होनी ही चाहिए। - शरद पाठक, महासचिव, अवध बार एसोसिएशनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ तो मिलेकोर्ट को शर्तों के साथ खोला जाना चाहिए। इसके अलावा मृतक वकीलों के परिवारीजनों की आर्थिक मदद, उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए सहायता हर अधिवक्ता परिवार का हक है। इसकी अपेक्षा हम सरकार से करते हैं। - अखिलेश अवस्थी, सदस्य बार काउंसिल उप्रसबकी मदद करने वालों की मदद की दरकारलगभग तीन साल से अधिवक्ता समाज परेशान है। सबकी मदद करने वाला आज अपने लिए बेहाल है। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की मौत हुई है। सरकार अभिभावक है तो उसे उनकी चिंता तो करनी चाहिए।- बृजेश कुमार यादव, महासचिव, सेंट्रल बार एसोसिएशनवकीलों का पलायन रोकना जरूरीकोरोना काल में तंगहाली से बड़ी संख्या में वकील काम छोड़कर गांव जा रहे हैं। वहां भी हालात बेहतर नहीं हैं। इसलिए जरूरी है कि सरकार इस ओर ध्यान दे और अधिवक्ताओं के लिए कोई सहायता की घोषणा करे। - भीम सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष, सेंट्रल बारमृतक अधिवक्ताओं के परिवारीजनों को मिले मुआवजाकोरोनाकाल में जिन अधिवक्ताओं की मृत्यु हुई है, उनके परिवार को सरकार 10 लाख रुपये की सहायता दे और ऐसे अधिवक्ताओं के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार उठाए।- ललित तिवारी, उपाध्यक्ष, अवध बार एसोसिएशनकोई न कोई लाभकारी योजना शुरू की जाएवर्तमान दौर में महामारी की विभीषिका से कई अधिवक्ता गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। लेकिन उनके लिए किसी भी प्रकार की लाभकारी योजना शुरू नहीं की गई है। इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। - विनय पांडेय, अधिवक्ता 75 फीसदी अधिवक्ता दिहाड़ी मजदूर की तरहजिला स्तर पर वकालत करने वाले अधिवक्ताओं की स्थिति दिहाड़ी मजदूर जैसी हो गई है। वर्चुअल सुनवाई की व्यवस्था निचले स्तर पर फेल है, इसे बदला जाना चाहिए। जूनियर वकीलों को सहायता भत्ता की शुरुआत की जाए। - बृजवीर मलिक, प्रदेश सचिव, आल इंडिया लायर्स यूनियन मेरठतहसील स्तर पर बनें न्यायिक मजिस्ट्रेटजजों की नियुक्ति में तीन साल के अनुभव का होना निश्चित करें। सभी तहसीलों पर न्यायिक कोर्ट बनाएं, जिलों पर भीड़ बढ़ रही है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं की पेंशन के बारे में भी सोचें। अदालतें शर्तों के साथ खोली जाएं। - अभय सैनी, अध्यक्ष, सहारनपुर अधिवक्ता एसोसिएशनआयुष्मान योजना में शामिल करें इस समय सबसे बड़ी जरूरत है कि अधिवक्ताओं को आयुष्मान योजना का लाभ मिले। कोरोना काल में वकीलों की सेहत व आर्थिक सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। हर ग्राम सभा में लीगल एडवाइजर की नियुक्ति की जाए।- शिरिश मेहरोत्रा, सदस्य यूपी बार काउंसिलएक बेंच आगरा में भी होइलाहाबाद हाईकोर्ट की एक बेंच आगरा में भी होनी चाहिए। इसका फायदा होगा कि मुकदमों के लंबित होने की संख्या कम होगी। दूसरे वकीलों के साथ-साथ अन्य लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। - गजेन्द्र शर्मा, अधिवक्ता, आगरावकीलों के लिए भी योजनाओं में आवास की व्यवस्था की जाए। दूसरा टोल टैक्स से राहत दी जाए और सबसे बड़ी बात है कि भौतिक सुनवाई शुरू कर दी जाए। डेढ़ साल से वकील सड़क पर हैं। - मंजु पांडेय, जॉइंट सेक्रेटरी, हाईकोर्ट बार एसो. इलाहाबादअधिवक्ताओं के लिए शुरू हो हेल्पलाइनवकीलों को आयुष्मान योजना का लाभ मिले। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से हो। इसके अलावा एक हेल्पलाइन अधिवक्ताओं के लिए हो, ताकि वे अपनी बात सीधे मंत्री तक पहुंचा सकें। - यशेन्द्र सिंह, अधिवक्ता, बरेलीवर्चुअल सुनवाई की कोई व्यवस्था तो की जाएवर्चुअल सुनवाई यदि जरूरी है तो कुछ ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे तकनीकी दिक्कतों से सुनवाई बाधित न हो। जिस तरह कंट्रोल रूम होता है, उस तरह कोई वर्चुअल रूम बनाया जाए।- विवेक शंकर तिवारी, पूर्व अध्यक्ष द सेंट्रल बार एसोसिएशन, वाराणसी

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 11, 2021, 02:24 IST
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