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कमल रानी: मतदाता पर्ची काटने से शुरू किया सफर, सपा-कांग्रेस के गढ़ में भाजपा को जिताकर बनीं मंत्री

उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री कमल रानी वरुण का रविवार को लखनऊ के एसजीपीजीआई में सुबह करीब साढ़े नौ बजे निधन हो गया। वह 62 वर्ष की थीं। कोरोना से संक्रमित होने के बाद उनका इलाज चल रहा था। एसजीपीजीआई के निदेशक प्रोफेसर आरके धीमान ने बताया कि प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमल रानी वरुण के इलाज में लगी टीम ने निरंतर प्रयास किया लेकिन फेफड़े का संक्रमण बढ़ता गया। हाई ब्लडप्रेशर और शुगर भी अनियंत्रित रहा। तमाम प्रयास के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके सम्मान में प्रदेश में एक दिन का राजकीय अवकाश घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। कमल रानी वरुण का जन्म 3 मई 1958 को लखनऊ में हुआ था। एलआईसी के अधिकारी किशन लाल वरुण से शादी के बाद वह कानपुर पहुंचीं। किशन लाल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े थे। उनके प्रोत्साहित करने पर कमल रानी ने आरएसएस द्वारा संचालित सेवा भारती में काम करना शुरू किया और अपनी मेहनत व लगन से कानपुर दक्षिण में सेवा भारती की मंत्री बनीं। इसके बाद उन्होंने सभासद का चुनाव लड़ा और द्वारिकापुरी वार्ड से जीत हासिल की। 1995 में वह एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरीं और लगातार दूसरी बार सभासद चुनी गईं। इसके बाद वह भाजपा की राजनीति में सक्रिय हो गईं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 02, 2020, 13:51 IST
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