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Kargil Vijay Diwas 2021: वीरगति को प्राप्त हुई बेटे की मां ने अपने खर्च पर बनाया शहीद द्वार, घर पर रहती हैं अकेली

देहरादून केशहीद विजय सिंह भंडारी 17 गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे। कारगिल युद्ध जब शुरू हुआ, तब उनकी शादी हुई थी। शादी हुए मात्र 10 दिन ही हुए थे। तभी उनकी छुट्टी निरस्त कर उन्हें बुला लिया गया। युद्ध की सूचना पर परिवार बैचेन हो गया था। मां बताती हैं कि यूनिट में पहुंचने के बाद उसने वहां पहुंचने की जानकारी दी थी। इसके बाद सीधे उसकी शहादत की खबर मिली। तीन बेटियों की शादी के बाद अकेले घर में रह रही मां रामचंद्री नम आंखों से बताती हैं कि शादी समारोह का जश्न फीका भी नहीं हुआ था कि उनके बेटे की छुट्टी रद्द कर उसे वापस बुला लिया था। कहा कि उनके बेटे की सेना में जाने की बहुत तमन्ना थी। Kargil Vijay Diwas 2021:देहरादूनमें शहादत की उपेक्षा, कहीं शिलापट गायब, तो कहीं मिट गए निशान वह घर का अकेला चिराग था, इसलिए घर वाले सेना में जाने से मना न कर दें, इसलिए विजय ने सेना में भर्ती होने की खबर परिवार से छिपाई थी। भर्ती होने के कुछ दिन बाद ही उन्होंने घर में यह खुशखबरी सुनाई थी। मां बताती हैं कि विजय के शहीद होने के बाद पत्नी घर छोड़ कर चली गई। मां रामचंद्री देवी बताती है कि उन्हें बेटे की पेंशन का मात्र 20 प्रतिशत हिस्सा ही मिलता है। विजय के शहीद होने के बाद पिता ने ही अपने खर्चे पर शामपुर में अपने आवास पर शहीद द्वार के साथ ही पंचायती मिलन केंद्र भी बनवाया था। आज भी वह द्वार की मरम्मत अपने खर्चे पर करती है। विजय के पिता भी सेना में थे। 2006 में उनकी मृत्यु हो गई। शहीद की मां का कहना है कि उन्हें इस बात का दुख है कि सरकार शहीद के माता-पिता को उचित सम्मान नहीं देती।कहा कि सरकार की ओर से मिलने वाला सम्मान पत्नी के साथ ही माता-पिता को भी मिलना चाहिए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 26, 2021, 10:31 IST
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शहीद विजय सिंह भंडारी 17 गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे। कारगिल युद्ध जब शुरू हुआ, तब उनकी शादी को मात्र 10 दिन ही हुए थे।