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क्या नेट बैंकिंग पर कम हो रहा है लोगों का भरोसा, लेनदेन के लिए यह डिजिटल माध्यम बना पहली पसंद

कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लोग अब ऑनलाइन लेनदेन को प्राथमिकता दे रहे हैं। सामान्य लोग भी अब घरेलू सामान की खरीदारी से लेकर आवश्यक सेवाओं के लिए फीस का भुगतान भी ऑनलाइन माध्यम से कर रहे हैं। नीति आयोग का लक्ष्य है कि आने-वाले समय में डिजिटल माध्यम से होने वाले लेनदेन की संख्या सौ करोड़ प्रतिदन तक की जा सके। इसके लिए विभिन्न माध्यमों से लेनदेन को बढ़ाया भी जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि व्हाट्सएप को डिजिटल पेमेंट माध्यम में कामकाज करने की अनुमति मिलने के बाद तेजी से इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक मार्च में 552.26 करोड़ डिजिटल लेनदेन किया गया था, जो फरवरी माह की तुलना में 15 फीसदी ज्यादा था। यह प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 18.5 करोड़ लेनदेन प्रतिदिन होता है, जबकि जनवरी में प्रतिदिन डिजिटल लेनदेन 16.8 करोड़ और फरवरी में 16.2 करोड़ था। माना जाता है कि लॉकडाउन की संभावनाओं के कारण मार्च महीने में लोगों ने ज्यादा खरीदारी की और इसके लिए डिजिटल माध्यम से भुगतान को प्राथमिकता दी, इस कारण इस तरह के आंकड़े सामने आये। रेजरपे की रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार के खुलने के बाद डिजिटल माध्यमों से होने वाली लेनदेन तेज हो रही है। जुलाई माह में UPI के माध्यम से होने वाली लेनदेन में सबसे ज्यादा 43 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि क्रेडिट-डेबिट कार्ड्स से होने वाली लेनदेन में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। नेट बैंकिंग अभी भी ग्राहकों के बीच अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय है और इसमें इस दौरान केवल 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 24/25 मार्च को लॉकडाउन शुरू होने के बाद के पहले एक महीने में डिजिटल लेनदेन के मामले में 30 फीसदी की गिरावट हुई थी। पूर्ण लॉकडाउन लागू होने के दौरान व्यापार में आई मंदी, ट्रेवलिंग पर लगी पाबंदी, खाने-पीने की चीजों की होम डिलीवरी और होटल-रेस्टोरेंट्स में खाने-पीने पर प्रतिबंध के कारण डिजिटल भुगतान में कमी आई। क्योंकि व्यवहार में देखा जाता है कि इन सेवाओं का प्रमुख उपभोक्ता युवा वर्ग इन सेवाओं के लिए ऑनलाइन भुगतान का माध्यम ज्यादा अपनाते हैं। नीति आयोग के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने प्रतिदिन सौ करोड़ डिजिटल भुगतान को लक्ष्य बताया है। इसके लिए आवश्यक ढांचा विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के लिए भी इस माध्यम को ज्यादा बेहद और कारगर बताया है। पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीनों पर रूपे कार्ड से होने वाली लेनदेन के मामलों में भी मार्च में 20 फीसदी की गिरावट आई थी। ग्राहकों ने इस माध्यम से फरवरी में 10,300 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जबकि मार्च महीने में यह रकम घटकर आठ हजार करोड़ से कुछ ज्यादा ही रह गई।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 07, 2020, 16:13 IST
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