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भारत में केवल 24 फीसदी लोगों में ही एंटीबॉडी, हर्ड इम्यूनिटी से काफी दूर

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया ग्रसित है और इस बीमारी को हराने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक तरह-तरह के शोध कर रहे हैं। कोविड-19 पर किया गया वैज्ञानिकों का शोध ये दावा करता है कि 60 से 70 फीसदी आबादी में अगर एंटीबॉडी विकसित हो जाए तो कोरोना, सामान्य वायरस की तरह ही रह जाएगा। हालांकि ये दावा भारत पर अभी लागू नहीं होता है, क्योंकि भारत हर्ड इम्यूनिटी से अभी काफी दूर है। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक बार अगर एंटीबॉडी लोगों के शरीर में विकसित हो जाती हैं तो कोरोना वायरस सामान्य खांसी, सर्दी और दूसरी मौसमी बीमारियों की तरह रह जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब क्षेत्र विशेष की आधी आबादी कोरोना के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेती है तो उसे हर्ड इम्यूनिटी कहा जाता है। हाल ही में भारत में किए गए सीरो सर्वे से ये पता चलता है कि भारत अभी हर्ड इम्यूनिटी से दूर है। हर्ड इम्यूनिटी के लिए किसी क्षेत्र की 60 से 70 फीसदी आबादी में एंटीबॉडी विकसित होनी चाहिए लेकिन भारत में केवल 24 फीसदी मरीजों में ही एंटीबॉडी विकसित हो पाई हैं। जानकार कहते हैं कि हर्ड इम्यूनिटी के बाद कोरोना वायरस के मामलों में गिरावट देखने को मिलती है। फ्रंटियर्स इन पब्लिक हेल्थ पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि समशीतोष्ण वाले इलाकों में जब हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो जाएगी, तो वहां कोविड-19 का प्रभाव कम हो जाएगा। समशीतोष्ण जोन में भारत, अमेरिका, कनाडा, जापान, न्यूजीलैंड, पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका आदि आते हैं। लेबनान में स्थित अमेरिकी यूनिवर्सिटी ऑफ बेरूत के डॉ हसन जराकोट का कहना है कि कोरोना वायरस अभी रहने वाला है और सालभर में इसकी लहरें देखी जा सकती हैं। लेकिन अगर हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो जाती है तो कोरोना का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाएगा। दोहा स्थित कतर यूनिवर्सिटी के डॉ हादी यासीन के मुताबिक जो वायरस सांस की बीमारी फैलाते हैं, उनका एक मौसमी पैटर्न होता है। समशीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में ठंड के दिनों में इंफ्लूएंजा और दूसरे वायरस ज्यादा विकसित होते हैं, जो सर्दी और खांसी का कारण बनते हैं। हालांकि यही वायरस उष्णकटिबंधीय इलाकों में सालभर सक्रिय रहते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि किसी वायरस के प्रसार के लिए तापमान और आर्द्रता दो मुख्य घटक हैं। मौसम के अनुरूप हवा, सतह और लोगों में संक्रमण का प्रसार प्रभावित होता है, लेकिन कोरोना वायरस इनसे अलग है क्योंकि वो बहुत तेजी से फैल रहा है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 17, 2020, 08:15 IST
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