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विश्व फलक पर छाई

कहते हैं ना जो स्वभाव का मीठा होता है वो सभी को अपना बना लेता है। यह खूबी हमारी हिंदी में भी है, जो आज अपनी इसी मिठास के कारण विश्व फलक पर छाई हुई है। दुनिया में हमारी मातृभाषा का बढ़ता महत्व हमें गौरवान्वित भी कर रहा है। सहजता और आत्मीयता से संवाद होने के कारण ही विश्व आज इसके सांस्कृतिक, राजनीतिक और अर्थिक महत्व को भी समझ रहा है और किसी भी तरह हिंदी से जुड़ना चाहता है। हिंदी को बोलने, पढ़ने और सीखने के लिए अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अभियान शुरू किया गया है। इसी क्रम में हुई परिचर्चा में हिंदी प्रेमियों, शिक्षाविदों, प्राचार्यों और प्राध्यापकों के साथ इस पर खुली चर्चा हुई। इस दौरान सभी हिंदी प्रेमियों ने एक सुर में कहा कि आज हिंदी का भारत या एशिया ही नहीं, पूरे विश्व में बोलबाला है। विदेशों में हिंदी भाषा का स्तर बढ़ा है। हो सकता है आने वाले समय में हिंदी ही विश्व की संपर्क भाषा हो। क्योंकि कई देशों में यह चुनाव प्रचार में शामिल होने के अलावा वहां के पाठ्यक्रम का भी हिस्सा बन चुकी है। -रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी करनाल। बात को सहज और सटीक तरीके से कहने के लिए हिंदी से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। हिंदी में सरलता और सहजता है, शब्दों से प्रेम झलकता है, इसलिए आज हिंदी विश्व फलक पर छाई हुई है। हिंदी भाषी होने पर हमें गर्व है। -डा. रामपाल सैनी, प्रिंसिपल, दयाल सिंह कॉलेज हिंदी का मान जरूर विदेशों में बढ़ा है, लेकिन हम भारतीय अपनी भाषा के प्रति जागरूक नहीं हैं। घर पर हिंदी में बात करेंगे, लेकिन बाहर इसे बोलने में कतराएंगे। जबकि, विदेशी हमारी भाषा को अपना रहे हैं। हमें इस दिशा में सुधार करना है। -सियाराम शास्त्री, डीओसी, स्काउट्स हिंदी के उन्नयन के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर शिक्षा को भाषा आधारित करने का प्रयास कर रही है। आज पूरे विश्व में हिंदी गुंजायमान है। आजादी से आज तक जनता के पास अपनी बात पहुंचाने का काम हिंदी ने ही किया है। --डा. चंद्रशेखर भारद्वाज, प्रिंसिपल, दयाल सिंह कॉलेज -आज हिंदी का विकास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी तेजी से हुआ है। विज्ञापन, बाजार व विपणन के क्षेत्र में हिंदी की मांग तेजी से बढ़ी है। इस कारण हर साल न जाने कितने विदेशी शिक्षक या विद्यार्थी भारत आकर मेहनत से हिंदी सीख रहे हैं। -डा. रणधीर, हिंदी विभाग के अध्यक्ष, दयाल सिंह कॉलेज भावों को उसी शब्दों में हमारी हिंदी भाषा ही बयां करती है। इसलिए हम अपनी भाषा से गहराई से जुड़े हैं और अब विदेशी नागरिक भी इसी विशेषता के कारण इसे अपना रहे हैं। आज इसकी प्रसिद्धि बता रही है कि आने वाला समय हिंदी का है। -डा. बीर सिंह, प्रोफेसर, गुरु नानक खालसा कॉलेज

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 04, 2020, 02:45 IST
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