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आर्थिक लाभ: केंद्रीय कर्मियों और पेंशनरों मिल सकती है 5.5 फीसदी की दर से वेतन बढ़ोतरी, सरकार ने तैयार किया फार्मूला

केंद्र सरकार अपने 49 लाख कर्मियों और 65 लाख पेंशनरों की दिक्कतें दूर करने का प्लान तैयार कर रही है। हालांकि कोरोना संक्रमण के बाद केंद्र सरकार पर कई तरह के वित्तीय दबाव भी आ गए हैं। कई विभागों के खर्चों में कटौती की जा रही है। अनुमानित आय प्राप्तियां और खर्च के अंतर को कम करने का प्रयास किया गया है। केंद्र सरकार के 15वें वित्तीय आयोग ने अपनी सिफारिशों में आय और व्यय का जो अनुमान बताया है, उसमें केंद्र सरकार के कर्मियों का वेतन पांच फीसदी की वृद्धि दर से और पेंशनधारकों को साढ़े पांच फीसदी के हिसाब से आर्थिक लाभ प्रदान करने की बात कही गई है। इसमें आयोग ने 2025-26 तक केंद्र सरकार की अनुमानित आय और व्यय का लेखा-जोखा तैयार कर दिया है। साल 2020-21 में सकल आय प्राप्तियां को लेकर 2,80,8037 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया था, लेकिन सरकार इस आंकड़े से पीछे रह गई। वित्तीय वर्ष के अंत में 2,13,5156 करोड़ रुपये ही एकत्रित हो सके। दूसरी ओर राजस्व व्यय 2690145 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बता दें कि कोरोना के चलते आर्थिक परिस्थितियां पक्ष में न होने के कारण भारत सरकार ने जनवरी 2020 से जुलाई 2021 तक अपने सभी कर्मियों की वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ते पर रोक लगा रखी है। पेंशनभोगियों की महंगाई राहत पर भी यह असर पड़ा है। हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही कर्मियों को उक्त आर्थिक लाभ प्रदान किया जाएगा। वित्तीय आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस निर्णय के आधार पर 2019-20 की तुलना में 2020-21 के वेतन में वृद्धि की ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राजस्व पर दबाव है, लेकिन सरकार उसे दूर करने का प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार अपने प्रतिबद्ध व्ययों में उपयुक्त मितव्ययिता उपाय लागू करेगी। इससे सरकार को महंगाई एवं अन्य भत्ते जारी करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। आयोग की मौजूदा रिपोर्ट में 2020-21 और 2021-22 के दौरान सरकारी कर्मियों के वेतन में एक फीसदी तथा पेंशन में 1.5 फीसदी की वृद्धि दर का आकलन किया गया है। उसके बाद कर्मियों की वार्षिक वेतन-वृद्धि और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता/राहत आदि में वृद्धि की जाए। इसके अंतर्गत वेतन में पांच फीसदी और पेंशन में 5.5 फीसदी की वार्षिक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। सरकार इसके लिए अपना खर्च कहां पर कम करेगी, रिपोर्ट में इसका जिक्र भी किया गया है। साल 2020-21 में सकल आय प्राप्तियां 2808037 करोड़ रुपये अनुमानित थी, लेकिन कोरोना के चलते सरकार इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी। साल के अंत में 2135156 करोड़ रुपये एकत्रित हो सके। साल 2020-21 में सकल आय प्राप्तियां 2429405 रहने का अनुमान है। वर्ष 2022-23 में 2684206 करोड़ रुपये, 2023-24 में 2999062 करोड़, 2024-25 में 3381073 और 2025-26 में 3841641 करोड़ रुपये की सकल आय प्राप्तियां होने का अनुमान लगाया है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि चालू वर्ष में सकल आय प्राप्तियों का जो अनुमान लगाया गया था, वह उससे काफी नीचे रहा है। यह अनुमान 2023-24 तक पूरा हो पाएगा। ऐसे दौर में केंद्र सरकार को अर्थव्यवस्था में कई तरह के संतुलित कदम उठाने होंगे। साल 2020-21 में सकल कर से होने वाली आय का अनुमान 2,42,3020 करोड़ रुपये लगाया गया था, जबकि वास्तविक मूल्यांकन में यह राशि 1,87,6118 करोड़ रुपये ही जुट सकी। इसका भी अनुमानित आंकड़ा 2023-24 में पार हो पाएगा। उस साल में 2,64,2322 करोड़ रुपये बतौर सकल कर आय प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया है। यह अनुमान 2025-26 में बढ़कर 3,40,1357 हो जाएगा। इनमें निगम कर, आयकर, सीमा शुल्क, सेंट्रल एक्साइज, सर्विस टैक्स, वस्तु एवं सेवा कर और दूसरे कर शामिल हैं। साल 2020-21 में नॉन टैक्स रेवेन्यू से प्राप्त आय का अनुमान 3,85,017 करोड़ रुपये लगाया गया था, लेकिन वास्तव में वह 2,59,038 करोड़ रुपये ही एकत्रित हो सके। साल साल 2024-25 में 3,94,873 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया गया है। साल 2025-26 में 4,40,284 करोड़ रुपये एकत्रित होने का अनुमान है। साल 2020-21 में केंद्र सरकार को 2,63,0145 करोड़ रुपये के राजस्व व्यय का अनुमान था, जबकि यह खर्च 2,69,0145 करोड़ रुपये रहा है। इसी अवधि में पेंशन का अनुमानित खर्च 2,10,682 करोड़ रुपये था। वास्तव में यह खर्च 1,86,392 करोड़ रुपये तक ही पहुंच सका। साल 2025-26 में यह खर्च 2,34,371 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। सामाजिक सेवा क्षेत्र में साल 2020-21 के दौरान 1,25,274 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान था, लेकिन 1,56,214 करोड़ रुपये खर्च हो गए। साल 2025-26 में इस खर्च के 2,54,941 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। सामान्य सेवाएं, जिनमें पेंशन, रक्षा व्यय, देय ब्याज राशि, पुलिस और विदेशी मामले आदि शामिल हैं, इनका साल 2020-21 में अनुमानित व्यय 1,27,0606 करोड़ रुपये था, जो वास्तव में 1,21,6748 करोड़ रुपये कर दिया गया। साल 2025-26 में इस खर्च के 1,77,6717 होने की संभावना है। केंद्र सरकार में वित्त मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं, सरकार पर वेतन वृद्धि और डीए की राशि जारी करने का दबाव है। कई कर्मचारी संगठनों ने इस बाबत ज्ञापन दिया है। सरकार अपने खर्च में कमी कर रही है। वित्तीय आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मियों को आर्थिक लाभ प्रदान किया जाएगा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 09, 2021, 17:59 IST
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केंद्र सरकार अपने 49 लाख कर्मियों और 65 लाख पेंशनरों की दिक्कतें दूर करने का प्लान तैयार कर रही है। हालांकि कोरोना संक्रमण के बाद केंद्र सरकार पर कई तरह के वित्तीय दबाव भी आ गए हैं। कई विभागों के खर्चों में कटौती की जा रही है।