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ई-लर्निंग विकल्प सही, कक्षा जैसी बात नहीं

पिछले दो माह से लॉकडाउन ने जीने ही नहीं पढ़ने का अंदाज भी बदल दिया है। लगातार ढाई माह से स्कूल बंद होेने से शिक्षा विभाग ई-एजूकेशन का सहारा ले रहा है। इसके अलावा टीवी, रेडियो पर शैक्षणिक प्रसारण, ऑनलाइन क्लासरूम, व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा मोबाइल एप भी घर बैठे पढ़ाई का सशक्त माध्यम बना है। इतने सब के बावजूद विद्यार्थियों का कहना है कि संकट काल में तो ठीक है लेकिन पूरे साल इन विकल्पों से पढ़ाई संभव नहीं है। वहीं, अभिभावक भी पढ़ाई के इस तकनीकी अंदाज को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि लगातार कई-कई घंटे स्मार्ट फोन पर पढ़ाई से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अभिभावकों की इस चिंता को आईटी एक्सपर्ट भी उचित ही बताते है। विशेषज्ञों की राय में दिन में पांच से छह घंटे मोबाइल प्रयोग करने से बीमारियों से संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।कोरोना काल से पहले अमूमन घर में बच्चे मोबाइल कार्टून देखने या गेम खेलने में प्रयोग करते थे। इस बात को लेकर उन्हें परिजनों से डांट भी सुननी पड़ती थी। कोरोना काल में स्कूल बंद होने से ऑनलाइन शिक्षण पद्घति में मोबाइल ही प्रयोग हो रहा है। व्हाट्सएप के जरिये बच्चों को होमवर्क दिया जा रहा है और एप के जरिए वो उस मेटर से संबंधी जानकारियां हासिल कर रहे हैं। हालांकि ज्यादातर अभिभावक ई-लर्निंग के पक्ष में नहीं हैं। विकल्प के तौर पर इसे सही मान रहे हैं। कुछ अभिभावकों का कहना है कि उनको पता ही नहीं चल पाता कि उनका बच्चा मोबाइल का सही प्रयोग भी कर रहा है या नहीं। पढ़िए अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट. छात्र बोले: जिज्ञासा का नहीं हो पाता तुरंत समाधान , भ्रम की स्थिति रहती है - ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान अध्यापक छात्रों के सवालों का हर संभव जवाब देने का प्रयास करते हैं। स्कूल में कक्षा- कक्षा में अध्ययन करवाना तो अलग ही बात है। कक्षा में टीचर का अलग से ही बच्चे पर प्रभाव पड़ता है। ऑनलाइन पढ़ाई शुरू होने से पहले माता-पिता मोबाइल इस्तेमाल पर टोक देते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। उनकी सोच में भी बदलाव आ गया है।मुस्कान, नौंवी कक्षा- क्लासरूम जैसी बात ई-लर्निंग में नहीं है लेकिन काफी हद तक टॉपिक समझ में आ जाते हैं। उनके टीचर एवं स्कूल प्रशासन पूरा प्रयास कर रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई शुरू होने से पहले माता-पिता मोबाइल का प्रयोग करने से डांटते थे लेकिन अब मोबाइल जरूरी मानते हुए माता-पिता मना नहीं करते। पढ़ाई के दौरान माता-पिता निगरानी भी रखते हैं।गौरव, कक्षा दसवीं-ऑनलाइन पढ़ाई मजबूरी में हो रही है। स्कूल बंद होने पर ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। स्कूली क्लासरूम की तो अलग ही बात है लेकिन ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में ऑनलाइन पढ़ाई एक बढिय़ा विकल्प है। काफी हद तक ऑनलाइन कक्षा में समझाया गया टॉपिक समझ में आ जाता है लेकिन जितनी एकाग्रता क्लासरूम में होती है उतनी ई-लर्निंग में नहीं बना पा रहे।आकस्मा, कक्षा दसवीं - मुझे कई बार ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कत भी आ जाती है उसे टीचर से फोन करके पूछना पड़ता है जिससे मोबाइल खर्च भी बढ़ता है। ऑनलाइन पढ़ाई नहीं होती तो घर में खाली बैठे रहते। अब बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। पहले मैं गेम खेलने में मोबाइल प्रयोग करती था लेकिन अब इसे पढ़ाई का जरिया बना लिया है। विभा, कक्षा पांचवीं- टीचर व्हाट्सएप गु्रप पर शिक्षण विषय वस्तु भेज देते हैं। कई बार टॉपिक समझ में नहीं आता। स्कूली क्लासरूम में तो टीचर से खड़े होकर सवाल पूछा जा सकता है। अब मोबाइल पर कॉर्टून या गेम आदि खेलना भी कम हो गया है। ई-लर्निंग से हमें फायदा भी मिल रहा है। स्कूल बंद रहने से शेड्यूल भी बिगड़ा हुआ है और ऑनलाइन पढ़ाई से उतना समय नहीं दे पा रहे।प्रिंस, कक्षा सातवीं- ऑनलाइन पढ़ाई के लिए जूम एप प्रयोग करता हूं। इस एप के जरिए सभी प्रकार के सवालों के जवाब खोजता हूं। जब कोई बात समझ नहीं आती तो टीचर को फोन करके पूछना पड़ता है। दिन में तीन- चार घंटे मोबाइल पर लगा रहना पड़ता है। मेरे परिजन ज्यादा फोन प्रयोग करने के पक्ष में नहीं है। स्कूल बंद होने से ई-लर्निंग के जरिए कम से कम पढ़ाई तो हो पा रही है। दीपांशु, कक्षा पांचवी- स्कूल में बढिय़ा पढ़ाई होती है। अब तो मोबाइल पर ही लगे रहना पड़ता है। मोबाइल का खर्च भी बढ़ गया है। स्कूल बंद होने की स्थिति में भी ई-लर्निंग के जरिए बहुत कुछ पढने को मिल रहा है। टीचर और पाठयक्रम के संपर्क में तो बने रहते हैं। हालांकि कक्षा में पढ़ाई करना मुझे अच्छा लगता है और ई-लर्निंग का पेटर्न तो मजबूरी में प्रयोग करना पड़ रहा है।चित्रांशु, कक्षा नौवीं- ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई तब उनके घर एंड्रायड फोन नहीं था। अब मजबूरी में फोन खरीदना पड़ा है। मोबाइल खर्च भी बढ़ गया है। ऑनलाइन तरीके से स्कूल जैसी पढ़ाई तो नहीं होती लेकिन फिर भी काफी सीख रहे हैं। अब माता-पिता मोबाइल प्रयोग करने से भी नहीं डांटते। ईशिका, कक्षा चौथी अभिभावक बोले: बढ़ गया मोबाइल खर्च, बच्चों को लत लगने की सता रही चिंता- मैं किसान हूं। मुझे तो ऑनलाइन पढ़ाई के बारे में समझ है नहीं। बच्चे जैसे- तैसे अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। मजबूरी में ये ऑनलाइन पढ़ाई भी सही ही है। बच्चे खाली तो नहीं रहेंगे। समय का सदुपयोग ही हो रहा है। -विजय कुमार- ऑनलाइन पढ़ाई तो मजबूरी में हो रही है। जब तक स्कूल नहीं खुलते हैं बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई करते रहेंगे। घर में रहकर कुछ तो सीखेंगें। मोबाइल खर्च तो जरूर बढ़ गया है। बच्चे इससे पहले भी मोबाइल पर लगे रहते थे। -ममता - ऑनलाइन पढ़ाई तो मजबूरी में करवानी पड़ रही है। मुझे तो मोबाइल का इतना ज्ञान नहीं है। दिन में बच्चे मोबाइल पर लगे रहते हैं। अब मजबूरी में बच्चों को फोन सौंपना पड़ रहा है। -शकुंतला- पहले मैं बच्चों को मोबाइल इस्तेमाल करने पर रोकती थी लेकिन अब माननी पड़ रही है। मोबाइल में बच्चे क्या पढ़ रहे हैं मुझे इतना ज्ञान भी नहीं है। पूछने पर बच्चे यही बताते हैं वे टीचर ने काम भेज रखा है।कांता देवी - बच्चे कुछ सीख लें इसलिए अब मोबाइल इस्तेमाल करने से भी उनको डांटा नहीं जा सकता। मजबूरी बनी हुई है। स्कूल खुलने में अभी कोई निश्चितता नहीं है। तब बच्चे कुछ न कुछ तो सीख रहे हैं। साल तो बेकार नहीं जाएगा। -गीता देवी - इब सरकार नै ही मोबाइल पै पढ़ाई शुरू कर दी तो मां-बाप भी बालक नै कैसे रोक व टोक सकै सै। पढ़ाई तो करणी पड़ैगी। मनै तो मोबाइल की जानकारी नहीं सै। बच्चे मोबाइल पर लागै जरूर रहसै। बेरा ना के सीखै सै। मोबाइल का खर्चा भी बढ़ ग्या।-राजेश

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 30, 2020, 23:57 IST
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