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Mohan Bhagwat Speech: हमारी आकांक्षा विश्वविजेता बनने की नहीं, हम लोगों को जीतना नहीं, जोड़ना चाहते हैं

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मौजूदा वक्त में देश और दुनिया के हालात को लेकर संघ का नजरिया सबके सामने रखा है। उन्होंने ज्ञानवापी मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि देश में सभी के पूर्वज समान ही थे। भागवत ने सवालउठाया कि आज हर जगह से शिवलिंग क्यों मिल रहे हैं।साथ ही संघ प्रमुख ने रूस-यूक्रेन युद्ध का हवाला देते हुएकहा कि हमारी आकांक्षा लोगों को जीतने की नहीं, बल्कि लोगों कोजोड़ने की है। साथ ही मौजूदा वैश्विक स्थिति के मद्देनजरभारत को अपनी ताकत बढ़ाने की बात भी कही। आज के मुसलमानों के पूर्वज भी हिंदू थे ज्ञानवापी को लेकर हिंदू-मुस्लिम विवाद पर संघ प्रमुख ने कहा, मामला जारी है। हम इतिहास नहीं बदल सकते। इसे न आज के हिंदुओं ने बनाया और न ही आज के मुसलमानों ने। यह उस समय हुआ था। इस्लाम हमलावरों के जरिए बाहर से आया था। हमलों में भारत की आजादी चाहने वालों का मनोबल गिराने के लिए देवस्थानों को तोड़ा गया। उन जगहों के मुद्दे उठाए गए हैं जो हिंदुओं की भक्ति से जुड़े हैं। हिंदू मुसलमानों के खिलाफ नहीं सोचते। आज के मुसलमानों के पूर्वज भी हिंदू थे। यह उन्हें हमेशा के लिए आजादी नहीं देने और मनोबल को दबाने के लिए किया गया था। इसलिए हिंदुओं को लगता है कि उन्हें (धार्मिक स्थलों) को बहाल किया जाना चाहिए। भारत किसी को जीतने के लिए नहीं, बल्कि जोड़ने के लिए अस्तित्व में है नागपुर में संघ के एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा, क्या हम विश्वविजेता बनना चाहते हैं नहीं, हमारी ऐसी कोई आकांक्षा नहीं है। हमें किसी को जीतना नहीं है। हमें सबको जोड़ना है। संघ भी सबको जोड़ने का काम करता है, जीतने के लिए नहीं। भारत किसी को जीतने के लिए नहीं बल्कि सभी को जोड़ने के लिए अस्तित्व में है। उन्होंने कहा कि नीति न हो तो सत्ता विकार बन जाती है। हम देख सकते हैं कि अभी रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है। इसका विरोध किया जा रहा है लेकिन कोई भी यूक्रेन जाने और रूस को रोकने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि रूस के पास शक्ति है और यह डराता है। रूस-यूक्रेन युद्ध में हथियार आपूर्ति करने वालों का फायदा भागवत ने कहा, जो विरोध कर रहे हैं उनका भी कोई नेक इरादा नहीं है। वे यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति कर रहे हैं, यह ऐसा है जब पश्चिमी देश भारत और पाकिस्तान को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करते थे और अपने गोला-बारूद का परीक्षण करते थे। यहां कुछ ऐसा ही हो रहा है। भारत सच बोल रहा है लेकिन उसे संतुलित रुख अपनाना होगा। सौभाग्य से, इसने वह संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। इसने न तो हमले का समर्थन किया और न ही रूस का विरोध किया। इसने यूक्रेन को युद्ध में मदद नहीं की, लेकिन उन्हें अन्य सभी सहायता प्रदान कर रहा है। वह लगातार रूस से बातचीत के लिए कह रहा है। यदि भारतीय पर्याप्त रूप से शक्तिशाली होते, तो युद्ध को रोक देते लेकिन ऐसा नहीं कर सकते। हमारी शक्ति अभी भी बढ़ रही है, लेकिन यह पूर्ण नहीं है। चीन उन्हें क्यों नहीं रोकता क्योंकि उसे इस युद्ध में कुछ नजर आ रहा है। इस युद्ध ने हम जैसे देशों के लिए सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों को बढ़ाया है। हमें अपने प्रयासों को और मजबूत करना होगा और हमें शक्तिशाली बनना होगा। अगर भारत के हाथ में इतनी ताकत होती तो दुनिया के सामने ऐसी घटना नहीं आती।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 02, 2022, 21:53 IST
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नागपुर में संघ के एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा, क्या हम विश्वविजेता बनना चाहते हैं नहीं, हमारी ऐसी कोई आकांक्षा नहीं है। हमें किसी को जीतना नहीं है। हमें सबको जोड़ना है।