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रमजान 2020: मस्जिद तक न आएं रोजेदार, घरों में बरसेगी खुदा की रहमत, इन बातों का रखें ध्यान

बागपत। आज से रहमतों का महीना शुरू हो गया। रोजे को इस्लाम का चौथा स्तंभ बताया गया है। शरीयत में रोजे को सौम या सियाम कहते है, जिसके मायने रुकना या ठहरना है। रमजान में रहमतों की बारिश होती है। गुनाहों को माफ कर दिया जाता है। रमजान का महीना तीन अशरों में बंटा है। शहर काजी हबीबुर्रमान और मौलाना आरिफ उल हक कहते हैं कि हर अशरा दस दिन का होता है। पहला अशरा रहमत वाला होता है। दूसरा अशरा मगफिरत के लिए और तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात पाने के लिए होता है। रोजेदार याद रखें यह बातें : - सामाजिक दूरी पालन कर घरों में नमाज अदा करें। - सामूहिक रूप से रोजा इफ्तार न करें। - रमजान के रोजे रखना फर्ज है। - रमजान सब्र और हमदर्दी करने का महीना है। - इबादत का शवाब सत्तर गुना ज्यादा होता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 24, 2020, 22:24 IST
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