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दिल्ली: किराएदारों को वायदेनुसार किराया देने के फैसले पर रोक, सरकार ने कहा- फैसले पर अमल संभव नहीं

दिल्ली सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान किराएदारों के किराए का भुगतान करने में असमर्थता जताई है। इस मामले में सरकार ने याचिका दायर कर हाईकोर्ट के सिंगल जज के उस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है जिसमें उसे किराएदारों के किराए का भुगतान करने के लिए नीति बनाने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने फेसले पर रोक लगा दी साथ ही सरकार से पूछा कि क्या वह राशि के कुछ हिस्से के भुगतान को तैयार है या नहीं। यह मामला कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान किराएदारों से किए गए वादे संबंधित था। मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि गरीब किराएदारों का किराया सरकार अदा करेगी।मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के ही सिंगल जज के फैसले पर रोक लगाई है। यह आदेश सिंगल जज न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह ने 22 जुलाई को दिया था। दिल्ली सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी है। पीठ ने मामले में याचिकाकर्ता को नोटिस जारी कर सुनवाई 29 नवंबर तय की है। दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि केजरीवाल का बयान कोई वादा नहीं है दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष वशिष्ठ से अदालत ने मौखिक रूप से पूछा कि क्या सरकार अपने वायदे के अनुसार किराएदारों को राशि का एक हिस्सा भी देने को तैयार है। दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि केजरीवाल का बयान कोई वादा नहीं है। अदालत ने पूछा आपका पेमेंट करने का कोई इरादा नहीं है लेकिन आपने बयान दिया था। क्या हमें इसे रिकॉर्ड करना चाहिए क्या आप 5 प्रतिशत भी भुगतान करने को तैयार हैं दिल्ली सरकार ने कहा कि निर्णय पर अमल संभव नहीं है।वहीं याचिकाकर्ता के अधिवक्ता गौरव जैन ने कहा कि सरकार ने संवादददाता सम्मेलन में कहा था कि जो किराएदार किराया देने में असमर्थ है उनका किराया सरकार अदा करेगी। सिंगल जज की बेंच ने दिल्ली सरकार को नीति बनाने को कहा था अधिवक्ता गौरव जैन ने कहा, याचिकाकर्ता बहुत गरीब है और एकल न्यायाधीश ने केवल दिल्ली सरकार से एक नीति बनाने के लिए कहा था। उन्होंने अदालत को बताया कि इसके लिए छह सप्ताह का समय दिया गया था, जिसे बढ़ाकर आठ सप्ताह कर दिया गया। यह बहुत आश्चर्य की बात है कि किराए की इतनी कम राशि के लिए, दिल्ली सरकार, जो राज्यों के बीच सबसे अधिक बजट में से एक होने का दावा करती है, वे इसका भुगतान करने से इनकार कर रहे हैं।अदालत के आदेश का पालन न कर वे आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं और उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई होनी चाहिए, ऐसे में फैसले पर रोक न लगाई जाए। पीठ ने उनके तर्क पर असहमति जताते हुए फैसले पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा फैसला मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस की ट्रांसक्रिप्ट और अन्य तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार कर निकाला गया। यदि रोक नहीं लगाई गई तो सरकार को अपूरणीय क्षति होगी। सिंगल जज ने फैसले में कहा था कि यह वादा किसी आम व्यक्ति ने नहीं बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया था और आम लोग मुख्यमंत्री पर विश्वास करते हैं। ऐसे में सरकार को अपने मुख्यमंत्री के वादे का सम्मान करते हुए एक नीति तय कर उसे पालन करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 27, 2021, 21:51 IST
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दिल्ली सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान किराएदारों के किराए का भुगतान करने में असमर्थता जताई है। यह मामला कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान किराएदारों से किए गए वादे संबंधित था।