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दिल्ली : हाईकोर्ट ने सुपरटेक को दिया आदेश, इस महीने के अंत तक खरीदार को लौटाए 40 लाख

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस माह के अंत तक एक खरीदार को 40 लाख रुपये लौटाने का निर्देश रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक को दिया है। खरीदार ने कंपनी के यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया में स्थित प्रोजेक्ट में 1.07 करोड़ में विला खरीदा था, लेकिन कब्जा मिलने में देरी पर कंपनी पर मुकदमा कर दिया था। न्यायमूर्ति अमित बंसल ने अपने आदेश में कहा कि 40 लाख के बाद 17 लाख रुपये का भुगतान नवंबर अंत तक करना होगा। कोर्ट ने कहा 40 लाख रुपये का इस्तेमाल खरीदार अपना ऋण वापस करने में करेगा।अदालत को बताया गया कि कंपनी पर खरीदार का 1.79 करोड़ रुपये बकाया थे, जिसमें से 50 लाख रुपये का भुगतान 24 सितंबर के आदेश के बाद कर दिया गया है। चूंकि मूलधन 1.07 करोड़ रुपये था इसलिए कोर्ट ने उसका निपटारा पहले करने का निर्देश कंपनी को दिया। गिरफ्तारी का वारंट किया था जारी हाईकोर्ट ने कंपनी के एमडी मोहित अरोड़ा को राहत देते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें तीन साल की सजा दी गई थी। आयोग ने आदेश का पालन न करने पर अरोड़ा की गिरफ्तारी का वारंट भी जारी कर दिया था। कंपनी 10 लाख रुपये की मासिक किस्तों में करना चाहती भुगतान हाईकोर्ट ने उक्त आदेश पर रोक लगाते हुए 1.79 करोड़ रुपये की राशि में 50 लाख रुपये का भुगतान खरीदार को एक सप्ताह में करने का निर्देश कंपनी को दिया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान सुपरटेक की ओर से वकील विकास सेठी ने तर्क रखा कि कंपनी बकाया राशि का भुगतान 10 लाख रुपये की मासिक किस्तों में करना चाहती है। अदालत ने कहा कि यह राशि उचित होनी चाहिए। खरीदार कंवल बत्रा की ओर से अधिवक्ता शैलेश माडियाल और वृंदा कपूर ने कहा कि कंपनी मूलधन की वापसी निकट भविष्य में करे ताकि बैंक का कर्ज उतार सके और बेटी की शादी के लिए कुछ राशि मिल जाए। गिलास को आधा खाली देखने के बजाय, आधा भरा हुआ देखिए अदालत ने इस पर वकील से कहा कि आप अखबार पढ़ते होंगे कि ये मामले इन दिनों कितने मुश्किल हो गए हैं। आपको (बत्रा) को शुक्रगुजार होना चाहिए कि कुछ वापस मिल रहा है। आप इस गिलास को आधा खाली देखने के बजाय, आधा भरा हुआ देखिए। आपको आपका पैसा वापस मिल रहा है। अदालत ने राशि के भुगतान की योजना पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 11 नवंबर तय कर दी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 05, 2021, 08:34 IST
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खरीदार ने कंपनी के यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया में स्थित प्रोजेक्ट में 1.07 करोड़ में विला खरीदा था, लेकिन कब्जा मिलने में देरी पर कंपनी पर मुकदमा कर दिया था।