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पूर्व रेल मंत्री ललित मिश्रा हत्याकांड : सीबीआई को मामले की पुन: जांच पर निर्णय लेने का निर्देश

हाईकोर्ट ने सीबीआई को करीब 45 वर्ष पहले पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा हत्याकांड की पुन: जांच करने के मुद्दे पर विचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह निर्देश मृतक मिश्रा के पोते वैभव मिश्रा की याचिका पर दिया है। याची ने कहा कि उनके दादा की हत्या एक बहुत बड़े राजनीति षड्यंत्र के तहत की गई थी और असली आरोपियों को बचाया गया है। न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने सीबीआई को छह सप्ताह में याची के मामले की पुन: जांच के लिए 4 नवंबर 20 को दिए ज्ञापन पर तय कानून के तहत विचार करने का निर्देश दिया है। पीठ ने सीबीआई को अपने निर्णय से याची को अवगत करवाने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। याची वैभव की और से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल के दादा तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की हत्या 2 जनवरी 1975 को बिहार समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर एक कार्यकर्म के दौरान बम के जरिए कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि परिवार के अनुसार यह हत्या एक बहुत बड़े राजनीतिक षडयंत्र के तहत की गई थी और उनकी हत्या के लिए गठित दो आयोग में से एक ने अपनी रिपोर्ट में इस तथ्य की भी पुष्टी की थी। ऐसे में उनके मुवक्किल ने गृह मंत्रालय व सीबीआई को ज्ञापन देकर मामले की पुन: जांच करवाने का आग्रह किया था। इसके अलावा दोनों आयोग की रिपोर्ट भी दिलवाने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के जज केके मैथयू का आयोग गठित किया। आयोग ने मामले में रंजन द्विवेदी, संतोषानद अवधूत, सुवदेशानंद अवधूत व गोपाल जी को आरोपी बनाया। इसके बाद जनता पार्टी सरकार ने पहले आयोग की रिपोर्ट पर संदेह जताते हुए 1977 में जस्टिस वीएम तारकुंडे आयोग का गठन किया। इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह गहरा राजनीति षडयंत्र था। यह रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई दिल्ली स्थानांतरित की गई थी और 15 दिसंबर 2014 को अदालत ने चारों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपियों की अपील पर वर्ष 15 में ही जमानत प्रदान कर दी थी और मामला अभी भी लंबित है। याची ने कहा अदालत ने जिन आरोपियों को सजा सुनाई है वे असली अपराधी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके दादा की हत्या के पीछे असली साजिशकर्ता राजनीतिक रूप से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा चूंकि मामला अभी भी अनसुलझा है और हत्या में उस समय अधिक राजनीतिक शक्तियों के संकेत मिलते है इसी कारण उन्होंने उचित जांच के लिए एजेंसी के समक्ष ज्ञापन दिया था। उन्होंने असली आरोपियों तक पंहुचने के लिए पुन: जांच जरूरी है। इस मामले में करीब 200 गवाह पेश किए गए थे वहीं आरोपियों ने अपने पक्ष में 40 गवाह पेश किए थे।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 21, 2021, 06:52 IST
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हाईकोर्ट ने सीबीआई को करीब 45 वर्ष पहले पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा हत्याकांड की पुन: जांच करने के मुद्दे पर विचार करने का निर्देश दिया है।