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प्रदेश के सभी जिलों की कचहरी में होगा वकीलों व उनके परिवार का टीकाकरण

लखनऊ। कोरोना काल में आर्थिक व सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहे प्रदेश के अधिवक्ताओं की सामूहिक मांग को स्वीकार करते हुए विधायी, न्याय व ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री ब्रजेश पाठक ने सभी जिला कचहरी पर वैक्सीनेशन कैंप लगाए जाने की बात कही है। उन्होंने यह घोषणा बृहस्पतिवार को अमर उजाला द्वारा आयोजित वर्चुअल संवाद में अधिवक्ताओं से बात करते हुए की। संवाद में प्रदेश भर से जुड़े अधिवक्ताओं ने अदालतों में वर्चुअल सुनवाई बंद कर इनके भौतिक संचालन की मांग भी की। इस पर कानून मंत्री ने शीर्ष अदालत से सिफारिश की बात कहते हुए आश्वासन दिया कि वह हर कदम पर वकीलों के साथ खड़े हैं। अपने सामाजिक सरोकारों की श्रृंखला में अमर उजाला द्वारा कोरोना काल में वकीलों-वकालत की समस्याएं, चुनौतियां, समाधान व अपेक्षाएं विषय पर वेबिनार का आयोजन बृहस्पतिवार को किया। मुख्य अतिथि कानून मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार ब्रजेश पाठक थे। मंत्री ने कोरोना काल में वकीलों को हुई दिक्कतों के लिए माफी मांगते हुए कहा कि मैं मंत्री रहूं या साधारण कार्यकर्ता, रहूंगा आपके साथ। वैक्सीनेशन के लिए प्रमुख सचिव को निर्देशित कर रहा हूं कानून मंत्री ने संवाद के दौरान कहा कि आज ही प्रमुख सचिव व सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित कर रहा हूं कि जिला कचहरी में कैंप लगाकार वकीलों व उनके परिवारीजनों के लिए टीकाकरण की व्यवस्था की जाए। अदालत को निर्देशित नहीं कर सकते, पर सिफारिश करेंगेवकीलों ने एक सुर में वर्चुअल अदालत संचालन वापस लेने की मांग की। इस पर कानून मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका सर्वोपरि है। हम उसे आदेशित नहीं कर सकते, लेकिन अधिवक्ता समाज की समस्या को सामने रखते हुए कोर्ट के भौतिक संचालन की सिफारिश जरूर करेंगे।वकालत की आमदनी सिर्फ 10 फीसदी साधन संपन्न लोगों के हाथमंत्री ने कहा कि यह दुखद है कि यदि चार लाख अधिवक्ता हैं तो उसमें से 10 फीसदी के पास ही सारी आमदनी है। संघर्षशील अधिवक्ताओं को कुछ नहीं मिलता। कमाई का एक बड़ा हिस्सा चुनिंदा लोगों तक सीमित रह गया है। आज भी साधन सम्पन्न लोगों के पास केस आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार हर संघर्षशील अधिवक्ता के साथ है।जूनियर अधिवक्ताओं के लिए जारी की जा चुकी धनराशि पत्र पत्रिकाओं के अध्ययन के लिए जूनियर अधिवक्ताओं को दी जाने वाली धनराशि के संबंध में भी शासनादेश हो चुका है। 5000 रुपये प्रति अधिवक्ता की दर से राशि दिसंबर में निर्गत कर दी गई है। यह करीब एक करोड़ 87 लाख 90 हजार रुपये है। शासनादेश दिसंबर 2020 में जारी हुआ है। यह रकम क्यों नहीं जारी हुई। बार काउंसिल की बैठक में इसे उठाना चाहिए। मैं दावे के साथ कहता हूं कि मुझे बार काउंसिल का सदस्य बनाइए और मैं तत्काल पास कराऊंगा। मेरा निवेदन है कि अधिवक्ता हितों से राजनीति न करें। मैं ये सुनने को तैयार नहीं कि कोई फाइल मैंने रोकी मैंने कभी अपनी टेबल पर कोई फाइल नहीं छोड़ी। सोने से पहले मैं सारे काम निपटाता हूं। मैं कोई धोखा नहीं दूंगा। हमने क्लेम पाने की आयु 60 से 70 साल की और इस मद में रकम भी जारी की है। इस मद में बड़ी संख्या में पूरे प्रदेश के मृतक अधिवक्ताओं के परिवारीजनों को भुगतान भी हुआ है। वहीं अधिवक्ता कल्याण निधि के जो लोग 5100 रुपये देकर सदस्य बनते हैं, उन्हें 25 साल बाद डेढ़ लाख रुपये प्राप्त होते हैं। यह रकम डेढ़ से पांच लाख रुपये करने की कार्यवाही प्रक्रिया में है। बजट में प्रावधान हो चुका है। कोविड से हालात सामान्य होने के बाद इससे संबंधित आदेश भी जारी होगा। वेबिनार में ये हुए शामिल कानून मंत्री के साथ संवाद कार्यक्रम में वाराणसी, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, प्रयागराज समेत प्रदेश के कई जिलों के अधिवक्ता, बार काउंसिल व बार एसोसिएशन के वर्तमान व पूर्व पदाधिकारियों ने शिरकत की।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 11, 2021, 02:19 IST
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