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सात घंटे तक किसानों के कब्जे में रही कोतवाली, भैंस पर लिखा...गूंगी-बहरी हो गई है सरकार

सात घंटे तक किसानों के कब्जे में रही कोतवाली, भैंस पर लिखागूंगी-बहरी हो गई है सरकारखुर्जा। पुलिस प्रशासन के खिलाफ बुधवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर खुर्जा कोतवाली में दोपहर 12 बजे दाखिल हो गए। करीब सात घंटे बाद शाम सात बजे किसान वापस रवाना हुए। रोड पर ट्रैक्टर लगाकर ट्रैफिक जाम कर दिया। कोतवाल का घेराव कर किसान शाम तक कोतवाली में जमे रहे। कोतवाली में भैंस लेकर आए किसानों ने उसके ऊपर गूंगी-बहरी सरकार का स्लोगन लिखा। पुलिस पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए किसानों ने कहा कि थाने और चौकी भ्रष्टाचार के अड्डे बनकर रह गए हैं। इसे लेकर किसानों ने कोतवाली में जमकर हंगामा किया। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले काफी संख्या में किसान ट्रैक्टर ट्राली में भरकर कोतवाली पहुंच गए। ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर किसान कोतवाली परिसर में घुस गए। वहीं कई किसानों ने कचहरी रोड पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर जाम लगा दिया। भाकियू के जिलाध्यक्ष बब्बन चौधरी ने कहा कि पुलिस इस समय पूरी तानासाही के साथ काम कर रही है। लगातार किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि थाने और चौकी भ्रष्टाचार के अड्डे बनकर रह गए। किसानों से वसूली की जाती है। बेवजह उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाती है। शिकायत करने पर उनकी बात नहीं सुनी जाती अभद्रता की जाती है। किसानों ने कहा कि चकबंदी में अनियमितताएं की जा रही हैं। कोरोना कर्फ्यू के दौरान बिजली के बिलों को माफ करने की मांग किसानों ने की। किसानों ने कहा कि लगातार उनके साथ हो रहा उत्पीड़न किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों ने कोतवाल के कक्ष में जाकर उनका घेराव किया। इसके बाद किसान कोतवाली स्थित उपनिरीक्षक के कमरे में तथा कोतवाली के साइड गेट पर ताला जड़ दिया। हंगामा करते हुए किसानों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कोतवाली प्रभारी दीक्षित कुमार त्यागी ने किसानों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं माने और दोपहर से लेकर शाम तक कोतवाली में डटे रहे। इस दौरान किसानों ने कोतवाली में भैंस लाकर उसके ऊपर स्लोगन लिख डाला कि सरकार गूंगी और बहरी हो चुकी है। हंगामे की सूचना पर एसडीएम लवी त्रिपाठी मौके पर पहुंच गई। उन्होंने भी किसानों को समझाने का प्रयास किया लेकिन किसान मानने को तैयार नहीं हुए। धरने पर बैठे बैठने वालों में आलोक चौधरी, सोएब, दलवीर, सोनू, बच्चू सिंह, केहर सिंह, जगदीश, दिनेश, सुदेश, विकास, लोकेश, तारीख अली मौजूद रहे। शाम सात बजे के बाद मामला शांत हुआ किसान वापस गए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 17, 2021, 00:54 IST
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