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यूपी चुनाव 2022: राजा महेंद्र के सहारे सियासी समीकरण भी साधते दिखे मोदी-योगी, जाटलैंड की सौ सीटों पर नजर

प्रतीकों के सहारे सियासी समीकरणों को परवान चढ़ाने और राजनीतिक बिसात को अपने मन-मुताबिक बिछाने में माहिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अलीगढ़ में इसी राह पर आगे बढ़ते नजर आए। लंबे समय से कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन और इसकी वजह से सियासी समीकरणों को प्रभावित करने वाले जाटों की नाराजगी की चर्चाओं के बीच उन्होंने अलीगढ़ में महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्रांतिकारी राजा महेंद्र प्रताप सिंह की स्मृति में बनने वाले राज्य विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटलैंड की लगभग सौ सीटों के समीकरणों को भी दुरुस्त करने की कोशिश की। इसके लिए प्रदेश सरकार को श्रेय देते हुए उन्होंने यह संदेश देने की भी कोशिश की कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री होने के कारण ही यह संभव हुआ। मोदी और योगी ने राजा महेंद्र प्रताप के प्रतीक के सहारे एक तरफ जाटलैंड को समझाने का प्रयास किया कि भाजपा ही उनके सरोकारों के सम्मान, स्वाभिमान और संवेदनाओं का ध्यान रख रही है। साथ ही इस इलाके के लोगों को ही नहीं बल्कि प्रदेश और देश भर के लोगों के दिमाग में यह बैठाने का प्रयत्न किया कि उनकी सरकार से पहले की सरकारों ने निहित स्वार्थ, तुष्टीकरण, वोटों की गणित के चलते देश के उन महापुरुषों को परदे के पीछे धकेल दिया जो उनकी तुष्टीकरण की नीति के आड़े आते थे। राजा महेंद्र प्रताप का महत्व दरअसल, राजा महेंद्र प्रताप सिंह वह शख्सियत थे जिन्होंने 35 साल निर्वासित जीवन बिताते हुए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। 1915 में पहली निर्वासित सरकार बनाकर अंग्रेजों की सत्ता को चुनौती दी थी। निर्वासित सरकार के वे राष्ट्रपति बने थे जबकि बरकत उल्ला खां उनके प्रधानमंत्री। जाट रियासत में जन्म लेने वाले राजा महेंद्र प्रताप ने सिर्फ आजादी की लड़ाई ही नहीं लड़ी बल्कि सामाजिक और शैक्षिक सुधारों के लिए भी काफी काम किया। राजधानी लखनऊ के पूर्व महापौर दिवंगत डॉ. दाऊ जी गुप्त ने एक बार बताया था कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह बड़े दार्शनिक और दूरदर्शी थे। उन्होंने धर्म व संस्कृति के बीच एक नई धारा प्रेम धर्म की स्थापना की थी। यही नहीं, उन्होंने 1909 में कौशल विकास की जरूरत महसूस करते हुए वृंदावन में देश की पहली पॉलीटेक्निक की स्थापना करने के साथ वर्ल्ड फेडरेशन बनाकर दुनिया के देशों के बीच समन्वय की जरूरत बताई थी। महात्मा गांधी तक उनका सम्मान करते थे । डॉ. गुप्त ने बताया था कि जाट परिवार से होने और अद्भुत ऐतिहासिक कार्य करने के नाते वे जाटों के ऑइकान बन गए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 15, 2021, 12:14 IST
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प्रतीकों के सहारे सियासी समीकरणों को परवान चढ़ाने और राजनीतिक बिसात को अपने मन-मुताबिक बिछाने में माहिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अलीगढ़ में इसी राह पर आगे बढ़ते नजर आए।