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स्मार्ट सिटी की सीईओ ने दी अनुमति, आज से साइकिलों का लगेगा शुल्क

चंडीगढ़। एक माह तक चले ट्रायल के बाद कंपनी मंगलवार से साइकिल चलाने के लिए शुल्क लेना शुरू कर देगी। स्मार्ट सिटी की टीम ने निरीक्षण कर सीईओ आनिंदिता मित्रा को रिपोर्ट सौंपी थी। सीईओ ने कंपनी को शुल्क लेने के लिए अनुमति दे दी है। अब पहले की तरह साइकिल का प्रति घंटे के हिसाब से शुल्क लगेगा।शहर में बीते 12 अगस्त को तत्कालीन प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और उनके सलाहकार धर्मपाल ने पब्लिक बाइक शेयरिंग योजना के पहले फेज का शुभारंभ किया था। इस दौरान 155 डॉकिंग स्टेशन से 1250 साइकिलें चलाई गई थीं। साइकिल की सुविधा शुरू होने के अगले दिन ही लोगों के सामने समस्याएं आने लगीं। किसी साइकिल का लॉक खुले बिना ही उपयोगकर्ता के रुपये कट रहे थे तो किसी उपयोगकर्ता की साइकिल का लॉक नहीं लग रहा था। वहीं, कुछ साइकिलों का कोड डालने पर एप पर प्रदर्शित ही नहीं हो रही थीं। इन सभी समस्याओं को लोगों ने स्मार्ट सिटी तक पहुंचाया। स्मार्ट सिटी ने कंपनी से जांचने को कहा तो पता चला कि नेटवर्क की समस्या के कारण एप ठीक से काम नहीं कर पा रहा था। कंपनी तत्काल एप से शुल्क काटने वाली सुविधा हटाकर निशुल्क कर दिया था। सड़कों पर चलने लायक नहीं साइकिलों के टायर, कंपनी बदलने को राजीशहर में चलने वाली ज्यादातर साइकिलों के टायर अपने आप निकल जा रहे हैं। कंपनी ने माना है कि पैडल से चलने वाली साइकिलों के टायर सड़कों पर चलने के लायक नहीं हैं। अब कंपनी ने पैडल से चलने वाली साइकिलों के टायर बदलने का फैसला लिया है। अब ठोस टायरों की जगह ट्यूब व हवा वाले टायर होंगे। प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनंदन मल्होत्रा ने बताया कि काफी दिनों तक चले ट्रायल के बाद सामने आया कि पैडल से चलने वाली साइकिलों के टायर सड़कों के अनुकूल नहीं हैं। साइकिलों को पंचर या हवा कम होने की शिकायत का सामना न करना पड़े, इसलिए इसमें ठोस टायरों का उपयोग किया गया था। वहीं, टायरों में छोटे-छोटे छेद किए गए थे, ताकि दबाव से साइकिल हल्की चले, लेकिन यह प्रयोग सफल नहीं हुआ। इलेक्ट्रिक साइकिल में यह समस्या नहीं है, क्योंकि इनके टायरों में छिद्र नहीं है, जिससे टायर की ग्रिप कमजोर नहीं होती है और यह ठीक से चलते हैं।सुरक्षा की जिम्मेदारी अभी भी पहेलीयोजना के तहत चलाई गईं साइकिलों को तोड़ने व दुरुपयोग की काफी तस्वीर सामने आईं थीं। इसके बाद कंपनी ने पुलिस को पत्र देकर पीसीआर की गश्त बढ़ाने और कैमरों को स्टैंड की तरफ करने की मांग की थी। वहीं, कंपनी ने अपनी भी टीम को लगाया था, लेकिन अभी स्मार्ट सिटी या पुलिस की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला है।कोट-योजना के तहत व्यवस्थाओं को अच्छी तरह से जांचा गया है। कंपनी की ओर से दावा किया गया था। उसके बाद हमारी टीम ने साइकिलों की जांच की थी। रिपोर्ट के अनुसार सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त मिलीं हैं। कंपनी को शुल्क लेने की अनुमति दे दी गई है।-आनिंदिता मित्रा, सीईओ, स्मार्ट सिटी परियोजना

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 21, 2021, 01:53 IST
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