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BCCI के चुनाव में दिग्गजों के बीच टक्कर, सौरव गांगुली से लेकर राजीव शुक्ला तक मैदान में

बीसीसीआई के 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के लिए बोर्ड के सभी 38 पूर्ण सदस्यों ने चुनाव कराकर अपने प्रतिनिधियों के नाम प्रशासकों की समिति (सीओए) को भेज दिए हैं। इनमें राजनीतिज्ञों के अलावा नामी क्रिकेटर शामिल हैं। निर्वाचन अधिकारी ने सभी 38 सदस्यों के प्रतिनिधियों को ड्राफ्ट चुनावी सूची में शामिल कर लिया है, लेकिन सात अक्तूबर तक आपत्तियां आने के बाद इन नामों की जांच की जाएगी। इसके बाद अंतिम चुनावी सूची जारी की जाएगी। राज्यों के चुनाव में पदाधिकारी भले ही कोई चुना गया हो, लेकिन उनकी ओर से प्रतिनिधि बड़े नामों का बनाया गया। गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन से संयुक्त सचिव पद त्यागने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह को प्रतिनिधि बनाया गया है। वहीं यूपी क्रिकेट एसोसिएशन ने अपना प्रतिनिधि कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला को बनाया है। राजस्थान से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और हिमाचल प्रदेश से पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम चंद धूमल के पुत्र और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के भाई अरुण सिंह धूमल को प्रतिनिधि बनाया गया है। डीडीसीए से मीडिया टाइकून रजत शर्मा और सौराष्ट्र से पूर्व बोर्ड सचिव निरंजन शाह के बेटे जयदेव शाह प्रतिनिधि बनाए गए हैं। गांगुली, अजहरुद्दीन व पटेल भी अंतिम सूची में कुछ राज्यों ने नामी क्रिकेटरों को अपना प्रतिनिधि बनाया है। बंगाल के अध्यक्ष सौरव गांगुुली और हैदराबाद केनए अध्यक्ष मोहम्मद अजहरुद्दीन अपने संघों से प्रतिनिधि बने हैं। कर्नाटक के अध्यक्ष भले रोजर बिन्नी बने हों लेकिन वोट देने के लिए पूर्व टेस्ट क्रिकेटर बृजेश पटेल को चुना गया है। रेलवे, यूनिवर्सिटी और सेना ने अपने क्रिकेटरों हरविंदर सिंह, राजीव नैय्यर और संजय वर्मा को प्रतिनिधि बनाया है। पंजाब से टीम इंडिया के बैटिंग कोच विक्रम राठौर के भाई राकेश राठौर, हरियाणा से मृणाल ओझा और तमिलनाडु से आरएस रामास्वामी प्रतिनिधि होंगे। कट सकते हैं कुछ नाम निर्वाचन अधिकारी एन गोपालस्वामी ने सात अक्तूबर तक राज्यों की ओर से भेजे गए प्रतिनिधियों के बारे में आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के 26 सितंबर के आदेश के तहत इनकी जांच की जाएगी। माना जा रहा है इनमें कुछ नाम कट भी सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक गांगुली और रजत शर्मा के विरुद्ध सीओए को शिकायत भेजकर इनका नाम प्रतिनिधि के तौर पर हटाने को भी कहा गया है। निर्वाचन अधिकारी की ओर से सभी प्रतिनिधियों की लोढ़ा कमेटी के संविधान के अनुसार योग्यता परखी जाएगी। इनमें कूलिंग ऑफ पीरियड और आयु-कार्यकाल प्रमुख हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 05, 2019, 08:43 IST
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