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अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद स्पेशल ऑपरेशन में उतरीं तीन टॉप सीक्रेट एजेंसियां, पत्थरबाज हुए 'नजरबंद'

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटने के बाद देश की तीन अहम सीक्रेट एजेंसियां मैदान में उतरी थीं। ये एजेंसियां आज भी ऑपरेशन में व्यस्त हैं। जब इनके नेटवर्क ने काम करना शुरू किया तो जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी भी पहले की तुलना में अधिक मारे गए और पत्थरबाजी की घटनाएं भी कम होने लगीं। सुरक्षा बलों और आतंकियों की मुठभेड़ के बीच पत्थराव करने वाले अब कहीं नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियों ने उन्हें घरों से बाहर निकलने का मौका ही नहीं दिया। उनके उस संचार तंत्र पर भी रोक लग गई, जिसके सिग्नल पर वे पत्थराव करने के लिए दौड़ पड़ते थे। पिछले साल में पत्थरबाजों ने करीब 666 घटनाओं को अंजाम दिया था, जबकि इस साल पहले छह माह में केवल 40 मामले सामने आए हैं। साल 2016 में पत्थरबाजी की 1587 घटनाएं हुई थी। केंद्रीय एजेंसी एवं जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, अनुच्छेद 370 हटने के बाद विशेष ऑपरेशन शुरू किया गया था। इसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस की खुफिया इकाई के अलावा आईबी और रॉ भी शामिल रही हैं। इसमें कोई शक नहीं कि जम्मू-कश्मीर पुलिस की इंटेलिजेंस इकाई को सभी एजेंसियां तव्वजो देती हैं। वजह, इस इकाई का खुफिया नेटवर्क काफी मजबूत माना जाता है। रॉ एवं एनटीआरओ जैसी एजेंसियों ने इसे बेहतर तकनीकी मदद उपलब्ध कराई है। वर्ष 2016, 2017 व 2018 के दौरान जितनी भी पत्थराव की घटनाएं हुई, उन सभी का गहन विश्लेषण किया गया। सैन्य बलों द्वारा जम्मू-कश्मीर में कहीं भी कोई अहम ऑपरेशन शुरू किया जाता, वहीं पर पत्थरबाज पहुंच जाते थे। ऑपरेशन शुरू होने के तीन मिनट के भीतर वहां पत्थराव करने वालों की भीड़ जमा हो जाती थी। इसका पता लगाया गया। बहुत से फोन नंबरों की जांच पड़ताल हुई। मालूम पड़ा कि पत्थरबाजों का एक समूह है जो आपस में सूचना के फैलाव को गति देता है। इसके लिए कुछ विशेष तकनीक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। यह पता लगाया गया कि युवाओं को पत्थरबाजी के लिए फंड कौन देता है। इस बाबत कार्रवाई शुरू की गई। इंटरनेट पर पाबंदियों के चलते पत्थरबाजों के मैसेज सर्कुलेट नहीं हो सके। इसके अलावा जो भी पत्थराव के लिए बाहर निकलता और ऑपरेशन में बाधा पहुंचाने का प्रयास करता, उसके खिलाफ एनआईए के नए कानून के तहत कार्रवाई की जाती। इससे युवाओं में एक डर पैदा हो गया। उनके तकनीकी उपकरण अब इंटेलिजेंस एजेंसियों की जद में थे। ऐसे में पत्थरबाज पीछे हटते चले गए। रॉ, आईबी और जम्मू-कश्मीर पुलिस की इंटेलिजेंस विंग ने उन ठिकानों का पता लगाया, जहां पर आतंकी छिपे हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजी विजय कुमार भी यह बात मानते हैं कि अनुच्छेद 370 के बाद केवल आतंकवाद के मामले ही नहीं, बल्कि पत्थराव की घटनाएं भी कम हो गई हैं। इसमें रॉ व आईबी का भरपूर सहयोग मिला है। इस साल 136 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं। यह सटीक इंटेलिजेंस का नतीजा है। हमारी टीमों को आतंकियों के छिपने की सही जानकारी मिल रही है। वे बिना कोई देरी किए प्लानिंग के साथ ऑपरेशन कर रहे हैं। ज्यादातर ऑपरेशन ऐसे रहे हैं, जिनमें सुरक्षा बलों को संबंधित इलाके के अलावा आतंकियों की संख्या एवं उनके पास किस तरह के हथियार या संचार साधन हैं, ये सब जानकारी भी मुहैया करा दी जाती है। इन सबका का नतीजा सामने है। आतंकी घटनाओं में कमी आ रही है और सुरक्षा बल आतंकवादियों को उनके ठिकाने पर पहुंच कर उन्हें ठोक रहे हैं। 2017 में हुई 623 पत्थरबाजी की घटनाओं में 574 से सीआरपीएफ जवान घायल हो गए थे। इस साल अभी तक डेढ़ दर्जन जवानों को चोट लगी है। गृह मंत्रालय भी मानता है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकवाद की घटनाओं में करीब 40 फीसदी की कमी आई है। गत वर्ष पहले छह माह में आतंकवाद की 188 घटनाएं सामने आईं। इस साल 120 आतंकी घटनाएं हुई हैं, जिनमें 136 आतंकियों को मार दिया गया। इस साल आतंकी घटनाओं में केवल एक नागरिक की मौत हुई है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 01, 2020, 20:27 IST
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