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आज का शब्द: बाहु और अज्ञेय की कविता- यह दीप अकेला स्नेह भरा 

अमर उजाला #39;हिंदी हैं हम#39; शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- बाहु, जिसका अर्थ है- भुजा, बाँह। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- यह दीप अकेला स्नेह भरा यह दीप अकेला स्नेह भरा है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो। यह जन है : गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा पनडुब्बा : ये मोती सच्चे फिर कौन कृती लाएगा यह समिधा : ऐसी आग हठीला बिरला सुलगाएगा। यह अद्वितीय : यह मेरा : यह मैं स्वयं विसर्जित : यह दीप, अकेला, स्नेह भरा है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 25, 2021, 17:58 IST
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आज का शब्द: बाहु और अज्ञेय की कविता- यह दीप अकेला स्नेह भरा