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खतरे से खाली नहीं हैं खरका-ददरी मार्ग के 24 किमी

मुहम्मदाबाद। बीस सालों से खरका-ददरी मार्ग का निर्माण न होने से इस सड़क की हालत इतनी जर्जर हो गई है कि वाहन तो दूर पैदल चलने में भी लोगों को दिक्कत होती है। लगभग 24 किमी के इस मार्ग में कहीं भी गिट्टी डामर नजर नहीं आता है। जिसके चलते इस सड़क की हालत कच्चे रास्ते से भी बदतर है। लोगों की मुसीबत बारिश के मौसम में और बढ़ जाती है। जब लगभग आधा दर्जन गांवों का संपर्क इस मार्ग से कट जाता है। खराब सड़क के कारण इस मार्ग पर कोई यात्री वाहन भी नहीं चलते है। इन गांवों के लोगों ने लोकसभा चुनाव के दौरान सड़क की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार भी किया था पर इसके बाद भी स्थिति जस की तस है।उरई मुख्यालय से खरका-ददरी तक के करीब 24 किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण लगभग बीस साल से नहीं कराया गया है। जिससे इस मार्ग पर पड़ने वाले गांव कुइया, धरगुआं, धमनी, ऐर, टीकर, खरका, ददरी के ग्रामीणों को उरई मुख्यालय आने-जाने में पसीना छूट जाता है। बारिश में तो इस मार्ग पर एक किलोमीटर भी सड़क चलने लायक नहीं होती है। पूरे मार्ग पर तालाब जैसा नजारा रहता है। इस मार्ग के अलावा मुख्यालय पहुंचने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है। ग्रामीणों ने कई बार सड़क निर्माण की मांग की पर अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान दे रहे हैं। नाराज ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया था। पीडब्ल्यूूडी के एई वीरेंद्र कुमार का कहना है कि इस मार्ग के निर्माण के लिए 28 करोड़ 58 लाख का स्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है। जो अभी स्वीकृत नहीं हुआ है। वहीं सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा भी मुख्यमंत्री से मिलकर इस मार्ग के निर्माण की मांग कर चुके हैं।एंबुलेंस भी आने से मना कर देती हैददरी गांव के कैलाश राजपूत का कहना है कि खराब सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। हालत यह है कि एंबुलेंस स्टाफ भी इस मार्ग पर आने से मना कर देता है। खराब सड़क की वजह से कई बार गंभीर मरीजों के साथ अनहोनी हो जाती है।राजनाथ सिंह के आने पर बनी थी सड़कटीकर के पूर्व प्रधान खेमचंद का कहना है कि वर्ष 2000 में तत्कालीन सीएम राजनाथ सिंह ददरी प्रवास के लिए आए थे, तब इस मार्ग का कायाकल्प हुआ था। तब से बीस साल बीतने के बाद इस सड़क की दुर्दशा पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।बच्चे भी नहीं जा पाते हैं पढ़नेखरका गांव निवासी वीरसिंह मुखिया का कहना है कि सड़क खराब होने के चलते इस मार्ग पर कोई भी वाहन नहीं चलते है। लोग अपने निजी साधनों से मुख्यालय आना जाना पड़ता है। रास्ता इतना खराब है कि गांव के बच्चे पढ़ने मुख्यालय नहीं जा पाते है।बारिश में टूट जाता है संपर्कऐर निवासी सगीर खान बोले कि इन गांवों में कोई बड़ा अस्पताल न होने के कारण मजबूरी में मुख्यालय ही आना पड़ता है। बारिश में मुख्यालय से इन गांवों का संपर्क टूट जाता है। बारिश में सिंगल मार्ग पर वाहन चलाना खतरे से खाली नहीं है। कई बार हादसे हो चुके हैं। ऐर निवासी सगीर खा- फोटो : ORAI पी डब्लू डी एई वीरेंद्र कुमार- फोटो : ORAI दादरी निवासी कैलाश राजपूत- फोटो : ORAI टीकर निवासी खेमचंद- फोटो : ORAI उरई कुईया मार्ग पर सड़क पर गड्ढे भरा पानी- फोटो : ORAI ऐर दादरी मार्ग पर भरा पानी व कीचड़- फोटो : ORAI

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 12, 2020, 23:53 IST
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